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28 Oct 2026, Wed

“ऋषिकेश के शिक्षाविद बीएन कुकरेती ने देहदान कर पेश की मानवता की मिसाल”

ऋषिकेश:(चीफ एडिटर) आजीवन ज्ञान का उजियारा फैलाने वाले ऋषिकेश के जाने-माने शिक्षाविद बीएन कुकरेती ने निधन के बाद देहदान कर मानवता की अनूठी मिसाल पेश की है। बुधवार 22 जुलाई 2026 को सुबह निधन होने पर उनकी इच्छानुसार परिजनों ने उनका पार्थिव शरीर चिकित्सा शिक्षा और शोध कार्यों के लिए एम्स ऋषिकेश को सौंप दिया।

बीएन कुकरेती भरत मंदिर इंटर कॉलेज में शिक्षक रहे और शिक्षा क्षेत्र में विशेष पहचान रखते थे। उनके पुत्र शैलेश कुकरेती ने बताया कि 30 जून 1996 को सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे समाज और पुराने छात्रों को अनुशासन और चरित्रवान जीवन की सीख देते रहे।उन्होंने जीवित रहते हुए 3 जून 2024 को देहदान का संकल्प पत्र भरकर निधन के बाद शरीर एम्स को सौंपने की इच्छा जताई थी। उनकी इच्छा के अनुसार बुधवार को एम्स के एनाटॉमी विभाग में देहदान की प्रक्रिया संपन्न कराई गई।

डॉ. राजू बोकन ने बताया कि देहदानी की आंखें भी 2 अन्य लोगों के जीवन को रोशन करेंगी। नेत्र बैंक की टीम द्वारा सफलतापूर्वक कॉर्निया निकालकर बैंक में सुरक्षित रख लिए गए हैं।अपराह्न में एम्स संस्थान द्वारा देहदान करने वाले महादानी के परिजनों को सम्मानित कर अभिनंदन किया गया।एम्स ऋषिकेश में पहला देहदान 27 दिसंबर 2012 को हुआ था। अब तक यहां कुल 104 लोगों द्वारा देहदान किया जा चुका है। संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में देहदान का बड़ा महत्व है। देहदान सबसे बड़ा दान और सबसे बड़ा धर्म है।

इस अवसर पर एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. मुकेश सिंगला, डॉ. राजू बोकन और तकनीकी सहायक अजय रावत सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

By zeeshan

Zeeshan डिजिटल मीडिया से जुड़े युवा पत्रकार हैं। वे Bhagwasanatantimes.com के साथ कार्यरत हैं और राजनीति, समाज, धर्म और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। डिजिटल पत्रकारिता में उनकी गहरी रुचि है, और वे निष्पक्ष और तथ्यात्मक खबरों के लिए जाने जाते हैं।

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