
हरिद्वार:(चीफ एडिटर) राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली के निर्देश एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण उत्तराखंड के तत्वावधान में शनिवार को जनपद हरिद्वार में वर्ष 2026 की तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हरिद्वार नरेन्द्र दत्त के मार्गदर्शन में आयोजित लोक अदालत में लंबित एवं प्री-लिटिगेशन मामलों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण किया गया।लोक अदालत के लिए जनपद में कुल 24 पीठों का गठन किया गया। जिला न्यायालय परिसर रोशनाबाद में 13, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग हरिद्वार में एक, बाह्य न्यायालय रुड़की में सात तथा लक्सर में तीन पीठों के माध्यम से मामलों की सुनवाई की गई।


राष्ट्रीय लोक अदालत में चेक बाउंस, मोटर दुर्घटना प्रतिकर, पारिवारिक विवाद, सिविल वाद, श्रम विवाद, विद्युत अधिनियम, बैंक ऋण वसूली तथा फौजदारी के शमनीय प्रकृति के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर लिया गया। लोक अदालत के माध्यम से मामलों का त्वरित निस्तारण होने से न्यायालयों में लंबित मुकदमों का बोझ कम करने में भी महत्वपूर्ण सफलता मिली।लोक अदालत के दौरान न्यायालयों में लंबित 3918 वादों तथा 207 प्री-लिटिगेशन मामलों, यानी कुल 4125 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल 18 करोड़ 57 लाख 35 हजार 981 रुपये की समझौता राशि पर सहमति बनी।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सिमरनजीत कौर ने लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों, अधिवक्ताओं एवं वादकारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत त्वरित एवं सुलभ न्याय का प्रभावी माध्यम है। इसके जरिए वर्षों से लंबित विवादों का आपसी सहमति से समाधान होता है, जिससे पक्षकारों के बीच चली आ रही कटुता समाप्त होने के साथ ही आपसी प्रेम, सौहार्द और सद्भाव को भी बढ़ावा मिलता है।

