रुड़की में वक्फ बिल को लेकर मचा बवाल, क़ाज़ी मोनिश की अगुवाई में उमड़ा जनसैलाब, पुलिस ने रोकी कलियर कूच
रुड़की,जिशान मालिक
दिनांक 9 अप्रैल 2025 मंगलवार की सुबह रुड़की की फिज़ा में कुछ अलग ही तनाव महसूस किया गया। चारों ओर एक अजीब सा सन्नाटा… लेकिन इस सन्नाटे के पीछे जो लहरें थीं, वो बहुत कुछ कह रही थीं। मंगलौर से अचानक बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग रुड़की की ओर बढ़ते दिखाई दिए। इनके आगे-आगे चल रहे थे क़ाज़ी मोनिश – एक ऐसा नाम, जो सर्व समाज की आवाज़ बन चुका है।
इनका लक्ष्य था कलियर है हाउस के सामने वक्फ कानून के खिलाफ प्रदर्शन, लेकिन पुलिस-प्रशासन को शायद पहले ही भनक लग चुकी थी। पूरी ताकत से प्रशासन हरकत में आ गया और प्रदर्शनकारियों को रुड़की के एसडीएम चौक पर ही रोक दिया गया। लेकिन यहीं से शुरू हुआ एक ऐसा घटनाक्रम, जिसने पूरे इलाके की धड़कनों को तेज़ कर दिया।
क़ाज़ी मोनिश ने वहीं मंच से जैसे ही माइक संभाला, भीड़ एक स्वर में गूंज उठी।
“ये लड़ाई सिर्फ मुसलमानों की नहीं… ये संविधान बचाने की लड़ाई है!”
हिंदू-मुस्लिम एकता, गंगा-जमुनी तहज़ीब, और लोकतंत्र की रक्षा की बात करते हुए उन्होंने सरकार पर सीधा हमला बोला –
“जब से केंद्र में भाजपा आई है, तब से किसी न किसी बहाने मुसलमानों को टारगेट किया गया है।”
पल-पल बदलते हालात के बीच, राष्ट्रीय मुस्लिम सेवा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नईम कुरैशी भी सामने आए और वक्फ बिल को “मुस्लिम विरोधी और अल्पसंख्यक विरोधी” बताते हुए चेतावनी दी –
“अगर ये बिल वापस नहीं लिया गया तो मुस्लिम समाज चुप नहीं बैठेगा।”
बात यहीं खत्म नहीं हुई। भीड़ अब कलियर की ओर कूच करने पर अड़ गई। हालात बेकाबू होने लगे। प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा घेराबंदी की, और मौके पर पहुंचे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आशीष कुमार मिश्रा, एसपी देहात शेखर चंद्र सुयाल और सीओ विवेक कुमार ने खुद मोर्चा संभाला। एक लंबी बातचीत के बाद, आंदोलनकारियों को शांत कराया गया।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा मोड़ आया जब राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। सवाल अब ये है कि क्या ये आंदोलन यहीं थम जाएगा? या ये सिर्फ एक शुरुआत थी उस लहर की जो आने वाले दिनों में और तेज़ होगी?
एक आग भड़क चुकी है… सवाल यही है कि अब ये कहां तक जाएगी?

