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4 Aug 2026, Tue

चिन्मय डिग्री कॉलेज में मनाई गई स्वामी चिन्मयानंद की 109 वीं जयंती….

 

हरिद्वार:(भगवा सनातन टाइम्स संवाददाता)चिन्मय डिग्री कॉलेज के संस्थापक स्वामी चिन्मयानंद की 109 वीं जयंती के अवसर पर महाविद्यालय सभागार में उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर स्वामी के 108 नामों का उच्चारण किया गया।

कार्यक्रम का पूर्व कॉलेज के प्राचार्य डॉ आलोक अग्रवाल, एसएफएस डायरेक्टर मधु शर्मा और डॉ मनीषा ने दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया।

इस अवसर पर उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम संचालक कृतिका चौधरी ने बताया कि स्वामी चिन्मयानंद के बचपन का नाम बालकृष्ण मेनन था जिनका जन्म 8 मई 1916 को केरल के एर्नाकुलम,भारत में हुआ था।

स्वामी चिन्मयानंद बचपन से ही जिज्ञासु और तार्किक स्वभाव की प्रवृत्ति के थे उनकी प्रारंभिक शिक्षा केरल में हुई।उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेजी, साहित्य कानून और पत्रकारिता में अध्ययन किया।

बालकृष्ण मेनन “The National Herald” जैसे प्रमुख अंग्रेजी अखबार में पत्रकार भी रहे। स्वामी स्वतंत्रता सेनानी भी रहे और ब्रिटिश सरकार द्वारा उन्हें जेल भी डाला गया,जेल में रहते हुए उन्होंने गहराई से आत्म मंथन किया और भारतीय संस्कृति योग और वेदांत की और उनका झुकाव हुआ। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने हिमालय की यात्रा भी की और वहां उन्होंने स्वामी शिवानंद (ऋषिकेश) से संपर्क किया बाद में हुए स्वामी तपोवन महाराज के शिष्य बने।

सन 1953 में उन्होंने चिन्मय मिशन की स्थापना की जिसका उद्देश्य प्राचीन वेदांत ज्ञान को आधुनिक युग के अनुसार सरल भाषा में प्रस्तुत करना था । स्वामी चिन्मयानंद ने 300 से अधिक शहरों में ज्ञान यज्ञ आयोजित किए, वेदांत केंद्र, स्कूल और अस्पताल अस्पताल शुरू किए। गीता उपनिषद और भगवत गीता और पुस्तके लिखी साथ ही विश्व भर में चिन्मय मिशन की शाखाएं स्थापित की।

स्वामी चिन्मयानंद का देहांत 1993 में अमेरिका में हुआ था, और उनक़े शरीर को भारत लाकर हिमाचल के सिद्धवाड़ी आश्रम में समाधि दी गई थी।

स्वामी चिन्मयानंद की जयंती के अवसर पर मुख्य अतिथि राधिका नागरथ ने कहा कि जब हम किसी की भी जयंती मनाते है तो उसका क्या उद्देश्य होता है उसका उद्देश्य होता है कि उसके आचरण को हम अपने जीवन में उतार सके। उन्होंने कहा कि स्वामी का कहना था कि हम ही अपने मित्र हैं और हम ही अपने शत्रु हमें अपने निगेटिव विचार को छोड़कर पॉजिटिव विचार की ओर बढ़ना चाहिए। गलत विचार आने पर हमे निराश नहीं होना चाहिए हमको नेगेटिव विचार को अपने से अलग रखना चाहिए ।

उन्होंने कहा कि नेगेटिव विचार मेरे मन में आया मैं इसमें नहीं हूं, आया था चला गया, हंसते हुए निकल जाएगा अगर आप पॉजिटिव हैं तो आपके मन में भी पॉजिटिव विचार आएंगे।

उन्होंने कहा कि स्वामी ने कहा था कि किसी को देना सबसे बड़ा धर्म और एक गुण है जैसे ज्ञान लेकिन ज्ञान देने से पहले आपको इसके बारे में जानना होगा।

इस अवसर पर प्राचार्य डॉ आलोक अग्रवाल, डॉ मनीषा , डॉ पी के शर्मा, डॉ आनंद शंकर सिंह एसएफएस डायरेक्टर मधु शर्मा, संतोष कुमार, डॉ ओम कांत, अंकुर चौहान, राखी गोयल, डॉ निधि, डॉ दीपिका , राजेश कुमार और महाविद्यालय का समस्त स्टाफ मौजूद रहा।

By zeeshan

Zeeshan डिजिटल मीडिया से जुड़े युवा पत्रकार हैं। वे Bhagwasanatantimes.com के साथ कार्यरत हैं और राजनीति, समाज, धर्म और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। डिजिटल पत्रकारिता में उनकी गहरी रुचि है, और वे निष्पक्ष और तथ्यात्मक खबरों के लिए जाने जाते हैं।

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