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26 Aug 2026, Wed

अदालत ने कहा– मजिस्ट्रेट का आदेश साक्ष्यों के बिना, अब हत्या के आरोप में पुलिसकर्मियों समेत अन्य पर गहराएगा शिकंजा

अदालत बोली – मजिस्ट्रेट ने बिना साक्ष्य जांच के दिया आदेश, हुई कानूनी त्रुटि

हरिद्वार,भगवा सनातन टाइम्स

हरिद्वार की तीसरी अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने क्रिमिनल रिवीजन संख्या 153/2025 (उपनिरीक्षक शरद सिंह एवं अन्य बनाम राज्य एवं अन्य) में अहम निर्णय सुनाया है। यह मामला माधोपुर क्षेत्र में हुई एक हत्या और उससे जुड़े विवादित आदेश को लेकर था।

अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा धारा 175(3) बीएनएसएस, 2023 के अंतर्गत दिए गए आदेश में कानूनी त्रुटियाँ थीं। मजिस्ट्रेट ने पुलिस की रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों की पर्याप्त जांच किए बिना आदेश पारित किया, जबकि कानून के अनुसार मजिस्ट्रेट को यह देखना आवश्यक था कि प्राथमिकी दर्ज करने और विवेचना के आदेश के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं या नहीं।

मामला उस घटना से जुड़ा है जब 24-25 अगस्त 2024 की रात मृतक ओल्हे उर्फ मोनू की गांव माधोपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों और अन्य व्यक्तियों ने मिलकर उनकी हत्या की। पुलिस जांच में इस घटना को पहले सामान्य हादसा बताया गया था, लेकिन बाद में मृतक के भाई की शिकायत पर मामला अदालत तक पहुँचा।

अदालत ने पाया कि प्रथम दृष्टया साक्ष्यों और गवाहों के बयान से यह स्पष्ट होता है कि मृतक के साथ मारपीट की गई थी और मामला साधारण नहीं था। साथ ही पुलिस की ओर से रिपोर्ट दर्ज करने और कार्रवाई में गंभीर चूक भी सामने आई।

फैसला

अपर सत्र न्यायाधीश ने मजिस्ट्रेट के आदेश को निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि इस मामले में विधिवत प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की जाए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 175(3) बीएनएसएस के अंतर्गत मजिस्ट्रेट को केवल औपचारिकता निभाते हुए आदेश पारित करने का अधिकार नहीं है, बल्कि उन्हें उपलब्ध साक्ष्यों और पुलिस की रिपोर्ट का गहन परीक्षण करना चाहिए।

➡️ इस फैसले के बाद अब पुलिस को मामले की दोबारा जांच करनी होगी और आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

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