Mungi Engineers में श्रमिक की मौत, पोस्टमार्टम को लेकर उठे सवाल; ESIC कार्ड और 7 अगस्त की मौत की चर्चा
ग्राइंडर से केमिकल ड्रम काटते समय ब्लास्ट की बात
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब प्रताप सिंह कथित तौर पर ग्राइंडर से केमिकल के ड्रम को काट रहे थे। इसी दौरान ड्रम में अचानक ब्लास्ट होने की बात सामने आ रही है।
बताया जा रहा है कि ब्लास्ट का असर पहले उनके सीने पर हुआ और इसके बाद चेहरे पर भी गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
हालांकि, हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, ड्रम में किस प्रकार का केमिकल था और उस समय सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं—इन सभी सवालों का जवाब आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
ESIC कार्ड को लेकर भी गंभीर सवाल
मामले में ESIC कार्ड को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रताप सिंह का ESIC कार्ड हादसे के करीब दो दिन बाद लेबर ठेकेदार द्वारा जनरेट किया गया।
यदि यह जानकारी सही है तो सवाल उठता है कि प्रताप सिंह की कंपनी में नियुक्ति के समय ESIC से संबंधित औपचारिकताएं पूरी हुई थीं या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिना ESIC कार्ड के कंपनी में नौकरी कैसे लगी और हादसे के बाद ही ESIC कार्ड क्यों बनाया गया?
इस संबंध में कंपनी और लेबर ठेकेदार का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
7 अगस्त को मौत की चर्चा, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं
इस पूरे मामले में एक और चर्चा सूत्रों के हवाले से सामने आ रही है। कुछ सूत्र यह दावा कर रहे हैं कि प्रताप सिंह की मौत 7 अगस्त 2026 को ही हो गई थी।
हालांकि, यह दावा उपलब्ध जानकारी से मेल नहीं खाता, क्योंकि दूसरी ओर जानकारी यह है कि प्रताप सिंह को 10 अगस्त 2026 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और 19 अगस्त 2026 को पोस्टमार्टम कराया गया।
इसलिए 7 अगस्त को मौत होने की बात की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। यह दावा फिलहाल जांच का विषय है। यदि 7 अगस्त की तारीख से संबंधित कोई मेडिकल रिकॉर्ड, मृत्यु प्रमाणपत्र या अन्य आधिकारिक दस्तावेज सामने आता है, तो मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
अस्पताल को पैसे देने के आरोप भी सामने आए
सूत्रों से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि प्रताप सिंह को उपचार के दौरान वेंटिलेटर पर रखा गया था। साथ ही मामले को छिपाने के लिए अस्पताल को कथित तौर पर पैसे दिए जाने की बात भी कही जा रही है।
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अस्पताल का पक्ष भी समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका है।
इसलिए अस्पताल से संबंधित इस दावे को फिलहाल केवल सूत्रों द्वारा लगाया गया आरोप माना जा रहा है।
10 अगस्त से 19 अगस्त तक क्या हुआ?
मामले में यह भी महत्वपूर्ण सवाल है कि यदि प्रताप सिंह को 10 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तो 19 अगस्त को पोस्टमार्टम क्यों कराया गया?
इन नौ दिनों के दौरान उनकी चिकित्सकीय स्थिति क्या थी? अस्पताल में किस प्रकार का उपचार हुआ? कंपनी और लेबर ठेकेदार ने क्या कार्रवाई की? मृत्यु से संबंधित दस्तावेज कब तैयार हुए? इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है।
कंपनी के HR और अधिकारियों से नहीं मिला पक्ष
मामले को लेकर Mungi Engineers Pvt. Ltd. के HR विभाग और कंपनी के अधिकृत अधिकारियों से मीडिया को आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।
अस्पताल का पक्ष भी अभी तक सामने नहीं आया है। कंपनी और अस्पताल का पक्ष प्राप्त होने के बाद उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।
अब जांच के घेरे में कई सवाल
- हादसे के समय प्रताप सिंह की नियुक्ति संबंधी दस्तावेज पूरे थे या नहीं?
- ESIC कार्ड हादसे के बाद क्यों जनरेट किया गया?
- केमिकल ड्रम को ग्राइंडर से काटने की अनुमति किसने दी?
- ड्रम में कौन सा केमिकल था?
- क्या आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे?
- हादसे की सूचना संबंधित विभागों को कब दी गई?
- 10 अगस्त से 19 अगस्त के बीच क्या-क्या प्रक्रिया अपनाई गई?
- पोस्टमार्टम 19 अगस्त को क्यों कराया गया?
- 7 अगस्त को मौत होने की जो चर्चा सामने आ रही है, उसकी सच्चाई क्या है?
फिलहाल इन सभी सवालों के जवाब आधिकारिक जांच, मेडिकल रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
यह समाचार उपलब्ध जानकारी और सूत्रों से प्राप्त दावों के आधार पर तैयार किया गया है। 7 अगस्त को मौत होने, अस्पताल को पैसे दिए जाने तथा अन्य आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कंपनी, अस्पताल और लेबर ठेकेदार का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी निष्पक्ष रूप से प्रकाशित किया जाएगा। किसी भी आरोप को अंतिम सत्य केवल सक्षम जांच एजेंसी या न्यायालय के निष्कर्ष के बाद ही माना जाएगा।

