
रुड़की:(जीशान मलिक) ग्राम पंचायत बेलड़ा की दैनिक स्वच्छता व्यवस्था अब अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। गुरुवार को विकासखंड भगवानपुर के विभिन्न ग्राम प्रधानों के दल ने बेलड़ा पहुंचकर गांव की सफाई व्यवस्था और सामुदायिक सहभागिता के मॉडल का अध्ययन किया। जिला पंचायत राज अधिकारी मो. मुस्तफा खान के अनुसार, बेलड़ा ने स्वच्छता को महज सरकारी व्यवस्था तक सीमित न रखकर इसे जनभागीदारी और महिला सशक्तीकरण से जोड़कर प्रभावी मॉडल के रूप में विकसित किया है।पंचायत भवन में आयोजित अध्ययन कार्यक्रम के दौरान स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं ने ग्राम प्रधानों को गांव में संचालित दैनिक सफाई व्यवस्था की पूरी जानकारी दी। महिलाओं ने बताया कि सूर्योदय के साथ ही प्रत्येक वार्ड और गली के लिए निर्धारित रूट चार्ट के अनुसार घर-घर से कचरा एकत्र किया जाता है। गीले और सूखे कचरे का प्राथमिक स्तर पर पृथक्करण, नालियों की नियमित सफाई और सार्वजनिक मार्गों पर झाड़ू लगाने की व्यवस्था रोस्टर के आधार पर संचालित की जाती है।


महिलाओं ने बताया कि शुरुआत में ग्रामीणों की आदतों में बदलाव लाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन चौपाल बैठकों और लगातार जन-जागरूकता अभियान के माध्यम से लोगों को स्वच्छता अभियान से जोड़ा गया। गीले कचरे से जैविक खाद तैयार करने तथा सूखे कचरे के सुरक्षित निस्तारण की प्रक्रिया की जानकारी भी ग्राम प्रधानों को दी गई।भगवानपुर से आए ग्राम प्रधानों ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के प्रबंधन कौशल, अनुशासन और कार्यप्रणाली की सराहना की। उन्होंने सफाई कार्य में उपयोग होने वाले संसाधनों, उपकरणों के रख-रखाव और ग्रामीणों का सहयोग हासिल करने के तरीकों के बारे में भी जानकारी ली।इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने गांव की गलियों और सार्वजनिक स्थलों का स्थलीय निरीक्षण किया। साफ-सुथरी गलियां, सुचारू नालियां और कचरे के ढेर से मुक्त सार्वजनिक मार्ग देखकर ग्राम प्रधान प्रभावित हुए।

ग्राम प्रधानों ने बेलड़ा के स्वच्छता मॉडल को अपने-अपने गांवों में लागू करने की इच्छा जताई। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को स्वच्छता व्यवस्था से जोड़कर जनभागीदारी बढ़ाने का संकल्प लिया। बेलड़ा का यह मॉडल ग्रामीण स्वच्छता के साथ-साथ नारी शक्ति और सामुदायिक आत्मनिर्भरता की मिसाल के रूप में उभर रहा है।

