पिरान कलियर:(जीशान मलिक) विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स के अवसर पर बरेली शरीफ से पैदल रवाना हुआ साबरी झंडे का काफिला कलियर शरीफ पहुंचा। सैकड़ों अकीदतमंद साबरी झंडा लेकर पैदल सफर करते हुए दरगाह साबिर पाक की चौखट पर पहुंचे और अकीदत पेश की।
सज्जादानशीन ख्वाजा सय्यद सूफी मेराज हुसैन साबरी ने बताया कि साबरी झंडे के साथ बरेली शरीफ से कलियर शरीफ तक पैदल सफर करने की यह रूहानी रस्म 38 वर्षों से जारी है। वर्ष 1989 में हजरत बाबा गुलाम जिलानी साबरी ने बरेली शरीफ से पैदल सफर करते हुए साबरी परचम लेकर कलियर शरीफ का रुख किया था। उन्होंने 29 सफर को साबिर पाक के 721वें सालाना उर्स के दौरान बरेली शरीफ की दरगाह नासिर मियां नोमेहला से पैदल यात्रा शुरू की थी।
यह काफिला फतेहगंज, रामपुर, मुरादाबाद, हरतला, कांठ, नहटौर, नजीबाबाद और हरिद्वार होते हुए कलियर शरीफ पहुंचा था। इसी के साथ साबरी झंडे के साथ पैदल कलियर पहुंचने की इस ऐतिहासिक और रूहानी परंपरा की शुरुआत हुई, जो आज भी पूरी अकीदत और एहतराम के साथ जारी है।साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स में इस रूहानी रस्म के तहत 38वां साबरी परचम पेश किया जाएगा। रिवायत के मुताबिक रबीउल अव्वल का चांद नजर आने के बाद मेहंदी डोरी से पहले बुलंद दरवाजे पर साबरी परचम की परचमकुशाई की जाएगी। इस दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहेंगे और दरगाह साबिर पाक की चौखट पर अपनी अकीदत पेश करेंगे।
हजरत बाबा गुलाम जिलानी साबरी द्वारा शुरू की गई इस रूहानी रस्म को उनके मुरीदों और खलीफाओं ने आगे बढ़ाया। वर्तमान में उनके खलीफा और सज्जादानशीन ख्वाजा सय्यद सूफी हाफिज मेराज हुसैन साबरी की सरपरस्ती में यह पैदल सफर जारी है। वहीं सूफी वसीम मियां साबरी बरेली शरीफ की सदारत में सैकड़ों अकीदतमंदों का काफिला बरेली शरीफ से पैदल रवाना होकर कलियर शरीफ पहुंचता है।
पैदल काफिले में शामिल जायरीन पूरे रास्ते दरूद-ओ-सलाम, जिक्र और फातिहा पढ़ते हुए अपना रूहानी सफर पूरा करते हैं। बरेली शरीफ से कलियर शरीफ तक का यह सफर महज एक यात्रा नहीं, बल्कि बुजुर्गाने दीन से जुड़ी अकीदत, मोहब्बत और रूहानी विरासत को आगे बढ़ाने का जरिया माना जाता है।अकीदतमंदों का कहना है कि यह परंपरा उनके बुजुर्गों की दी हुई अमानत है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी है। हर साल साबिर पाक के उर्स के मौके पर निकलने वाला यह पैदल काफिला अब इस रूहानी परंपरा की पहचान बन चुका है।
इस मौके पर बाबा मेशी शाह साबरी, सभासद राशिद अली, गुलफाम साबरी, इस्तखार साबरी, इंतजार अली, शान साबरी, फहीम साबरी, तसलीम साबरी, डीके साबरी, धर्मेंद्र कुमार, आफताब साबरी सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।

