देहरादून:(जीशान मलिक) वन उपज के अवैध भंडारण और व्यापार पर रोक लगाने के लिए वन विभाग ने देहरादून और हरिद्वार वन प्रभाग की संयुक्त टीमों के साथ बड़ा अभियान चलाया। मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल और वन संरक्षक शिवालिक के निर्देशों पर ये कार्रवाई उत्तर प्रदेश लीसा तथा अन्य वन उपज विनियमन अधिनियम, 1976 के तहत की गई।
“पहली कार्रवाई: भगवानपुर में डिपो सीज”
उप प्रभागीय वनाधिकारी देहरादून डॉ. उदय नन्द गौड़ के नेतृत्व वाली 22 सदस्यीय टीम ने हरिद्वार के भगवानपुर में एक पंजीकृत लीसा डिपो का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के समय परिसर में कोई स्वामी या अधिकृत प्रतिनिधि मौजूद नहीं मिला।टीम को ड्रमों में विरोजा और तारपीन तेल मिला, लेकिन स्टॉक रजिस्टर, क्रय-विक्रय अभिलेख, परिवहन प्रपत्र समेत कोई भी जरूरी दस्तावेज नहीं दिखाए जा सके। अभिलेखों के अभाव में सामग्री का सत्यापन न होने पर विभाग ने पूरे परिसर को अग्रिम आदेशों तक सीज कर दिया और जांच शुरू कर दी है। इकाई स्वामी को अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इस टीम में रेंज अधिकारी दीक्षा, मोहन सिंह रावत, महेन्द्र गिरी, उपराजिक गजेन्द्र, वन दरोगा और बीट अधिकारी शामिल रहे।
“दूसरी कार्रवाई: ऋषिकेश की इकाई में सब ठीक”
इसी क्रम में उप प्रभागीय वनाधिकारी रुड़की ज्वाला प्रसाद के नेतृत्व में दूसरी टीम ने ऋषिकेश के लालतप्पड़ स्थित जय भारत रोज़िन एण्ड केमिकल्स प्रोडक्ट्स का निरीक्षण किया। यहां उपलब्ध वन उपज और अभिलेखों की जांच में कोई अनियमितता नहीं मिली।इस टीम में रेंज अधिकारी खानपुर प्रियांशु पाण्डेय, रेंज अधिकारी गणेश उनियाल, वन दरोगा और संबंधित बीट अधिकारी शामिल थे।
प्रभागीय वनाधिकारी देहरादून नीरज शर्मा और प्रभागीय वनाधिकारी हरिद्वार स्वपनिल अनिरुद्ध ने कहा कि वन उपज के भंडारण, परिवहन और व्यापार से जुड़े हर प्रतिष्ठान को नियमानुसार अभिलेख रखना और निरीक्षण के समय प्रस्तुत करना अनिवार्य है। अवैध भंडारण या नियम उल्लंघन पर कठोर वैधानिक कार्रवाई होगी।अधिकारियों ने बताया कि वन उपज के अवैध व्यापार पर प्रभावी नियंत्रण और वैध व्यापार व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आने वाले दिनों में भी आकस्मिक और संयुक्त निरीक्षण अभियान लगातार चलाए जाएंगे।

