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8 Jun 2026, Mon

साध्वी आर्यिका रत्न पूर्णमति माताजी का जुर्स कंट्री में मंगल आगमन; प्रेम नगर आश्रम में होगा भव्य भक्तामर विधान

हरिद्वार:(चीफ एडिटर) जैन समाज की प्रतिष्ठित साध्वी आर्यिका रत्न पूर्णमति माताजी का आज कोर कॉलेज से विहार कर पतंजलि योगपीठ होते हुए जुर्स कंट्री (Jurs Country) में मंगल आगमन हुआ। पतंजलि आगमन पर योग ऋषि स्वामी रामदेव जी एवं आचार्य बालकृष्ण जी ने माताजी का भावभीना स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

“जीवन में कर्मों का सुधार आवश्यक: पूर्णमति माताजी…

जुर्स कंट्री में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए माताजी ने जीवन की नश्वरता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “मनुष्य जीवन भर उन वस्तुओं को एकत्र करने में लगा रहता है जो अंततः निरर्थक हैं। मृत्यु के पश्चात कुछ भी साथ नहीं जाता, यदि कुछ साथ जाता है तो वह हैं हमारे कर्म। इसलिए भौतिक वस्तुओं के पीछे भागने के बजाय अपने कर्मों को सुधारने की नितांत आवश्यकता है।”

माताजी ने अपने प्रवचन में आगे कहा कि मनुष्य को अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिए सदैव अच्छे कर्म करने चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छे कर्म ही हमारे जीवन को सफल बनाते हैं और हमें मोक्ष की प्राप्ति में मदद करते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन को अच्छे कर्मों से भरें और अपने जीवन को सार्थक बनाएं।

“ऋषभदेव की तपस्थली में ‘समवशरण’ की प्रेरणा…

माताजी ने हरिद्वार की आध्यात्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की तपस्थली रही है। उन्होंने खेद व्यक्त किया कि वर्तमान में यहाँ उन प्राचीन स्मृतियों का कोई स्पष्ट चिह्न शेष नहीं है। उन्होंने प्रेरणा दी कि यहाँ एक भव्य ‘समवशरण’ की रचना होनी चाहिए, ताकि भावी पीढ़ियाँ इस पवित्र इतिहास से जुड़ सकें।

माताजी ने कहा कि हरिद्वार की पवित्र भूमि पर एक भव्य ‘समवशरण’ का निर्माण करना एक महत्वपूर्ण कार्य होगा। इससे न केवल भगवान ऋषभदेव की तपस्थली को सम्मान मिलेगा, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल के रूप में भी विकसित होगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे इस पवित्र कार्य में अपना योगदान दें और इस पवित्र स्थल को विकसित करने में मदद करें।

“5 मार्च से ‘भक्तामर विधान’ का आयोजन…

धर्मसभा के दौरान आगामी कार्यक्रमों की घोषणा करते हुए बताया गया कि माताजी के पावन सानिध्य में 5 मार्च से 12 मार्च के मध्य प्रेम नगर आश्रम में एक भव्य भक्तामर विधान आयोजित किया जाएगा। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से इस पुण्य अवसर पर सहभागी बनने का आह्वान किया।

इस भक्तामर विधान में श्रद्धालुओं को भगवान ऋषभदेव की पूजा करने और उनके जीवन के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, इस विधान में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और प्रवचन भी आयोजित किए जाएंगे। माताजी ने कहा कि यह विधान एक महत्वपूर्ण अवसर होगा जिसमें श्रद्धालु अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिए प्रेरणा प्राप्त कर सकते हैं।

“श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति…

इस मंगल अवसर पर मुख्य रूप से यू.सी. जैन सपरिवार, संदीप जैन (एक्कमस) सपरिवार, बालेश जैन, निर्मल जैन, सतीश जैन, विजय जैन, संदीप जैन (ओमेगा), रवि जैन, समर्थ जैन, पीयूष जैन, नितेश जैन, आदेश जैन, ओमकार जैन और विजय जैन (ज्वालापुर) सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन अरविंद शास्त्री द्वारा किया गया। जुर्स कंट्री पहुँचने पर स्थानीय निवासियों और जैन समाज के प्रतिनिधियों ने माताजी की भव्य अगवानी की।

By zeeshan

Zeeshan डिजिटल मीडिया से जुड़े युवा पत्रकार हैं। वे Bhagwasanatantimes.com के साथ कार्यरत हैं और राजनीति, समाज, धर्म और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। डिजिटल पत्रकारिता में उनकी गहरी रुचि है, और वे निष्पक्ष और तथ्यात्मक खबरों के लिए जाने जाते हैं।

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