
हरिद्वार:(भगवा सनातन टाइम्स संवाददाता)हरिद्वार की पावन धरती पर एक अद्भुत मंथन हुआ। उत्कर्ष स्पोर्ट्स फेडरेशन द्वारा आयोजित द्वितीय हरिद्वार ओपन रैपिड शतरंज प्रतियोगिता ने जैसे शतरंज प्रेमियों के दिलों की धड़कनें बढ़ा दीं। हर चाल में दांव पर थी प्रतिष्ठा, और हर मोहरे के पीछे छुपा था जीत का सपना।


प्रतियोगिता के दौरान युवा मस्तिष्कों ने अपनी सूक्ष्म रणनीतियों से ऐसा समां बाँधा कि दर्शक साँसें थामे देखते रह गए। अंडर-10 वर्ग में धैर्य नेगी ने अद्भुत संयम और धैर्य का परिचय देते हुए बाजी मारी, जबकि दीपेश पटेल और शौर्य त्यागी ने आखिरी क्षण तक रोमांच बनाए रखा। अंडर-13 वर्ग में लक्षिता ने अपनी बेमिसाल चालों से पहला स्थान छीन लिया, वहीं सक्षम जैन और शौर्य नारायण शर्मा ने भी जबरदस्त टक्कर दी।

जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ा, तनाव की रेखाएँ स्पष्ट होने लगीं। अंडर-15 वर्ग में अमोघ पांडेय ने कठिन संघर्षों के बीच शीर्ष स्थान पर कब्जा जमाया, दर्शित पांडेय और रूद्रांश मौर्य भी विजय के बेहद करीब पहुँचकर शौर्य का परिचय देते रहे।
वरिष्ठ नागरिक वर्ग में भी कम कुछ नहीं था — कुलदीप आचार्य ने अपने अनुभव का पूरा लाभ उठाते हुए सभी प्रतिद्वंद्वियों को मात दी, जबकि क्रांति कुमार गुप्ता और कमर खान ने भी आखिरी तक हार नहीं मानी। महिला वर्ग में गौरी मित्तल ने एक के बाद एक विरोधियों को चकमा देते हुए शिखर पर कदम रखा।
पर असली महासंग्राम तो ओपन वर्ग में देखने को मिला — जहाँ हर मोहरा एक रणवीर और हर चाल एक युद्धनीति बन गई थी। अममान सिंह बख्शी ने घातक चतुराई दिखाते हुए पहला स्थान पाया, जबकि अभिनीत सिन्हा और विनय राज भट्ट ने कड़े संघर्ष के बावजूद क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया।
प्रतियोगिता के समापन पर कुल पचास हजार रुपये की पुरस्कार राशि के साथ विजेताओं को सम्मानित किया गया। समाजसेवी डा. विशाल गर्ग और स्वामी निर्मल दास ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा, “मानसिक विकास, एकाग्रता और अनुशासन से ही विश्व पटल पर विजय पताका फहराई जा सकती है।”
उत्कर्ष स्पोर्ट्स फेडरेशन के अध्यक्ष डा. मुकुल बेंजवाल ने प्रतियोगिता को ग्रैंडमास्टर बनाने के मिशन का एक अहम कदम बताया। उनके शब्दों में प्रतिबद्धता की स्पष्ट झलक थी, “उत्तराखंड का कोई खिलाड़ी विश्व पटल पर चमके — यही हमारा सपना है।”
प्रतियोगिता खत्म हुई, पर शतरंज की उन गूढ़ चालों की गूँज अभी भी हवा में तैरती रही… जैसे हर मोहरे ने अपनी एक कहानी हरिद्वार की हवाओं में बिखेर दी हो।

