Breaking
3 Aug 2026, Mon

हरिद्वार में भारतीय सेना का दमखम प्रदर्शित: ‘रैम प्रहार’ अभ्यास ने दिखाई आधुनिक युद्ध क्षमता

हरिद्वार:(चीफ एडिटर)हरिद्वार भारतीय सेना की रणनीतिक शक्ति और तकनीकी दक्षता का केंद्र बना, जब खड़ग कोर के अंतर्गत आने वाली रैम डिविजन ने अपने बहु-क्षेत्रीय युद्धाभ्यास ‘रैम प्रहार’ का सफल समापन किया। पश्चिमी कमांड के जीओसी–इन–सी लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने स्वयं मैदान में उतरकर इस उच्च स्तरीय अभ्यास का निरीक्षण और मान्यकरण किया।

यह अभ्यास केवल पारंपरिक सैन्य क्षमता का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि आधुनिक तकनीक, रियल-टाइम डेटा और बहु-डोमेन ऑपरेशंस के माध्यम से भविष्य के युद्धक्षेत्रों के लिए तैयार एक तेज, चुस्त और तकनीक-सक्षम भारतीय सेना की झलक भी था।

अभ्यास में भूमि, वायु और साइबर तीनों क्षेत्रों में परिचालनिक गति, समन्वय और त्वरित निर्णय क्षमता का प्रदर्शन किया गया। वर्तमान संवेदनशील सुरक्षा परिस्थितियों में यह अभ्यास भारत की रणनीतिक मजबूती और रोकथाम शक्ति का प्रभावी संकेत भी देता है।

अभ्यास के दौरान सेना की आधुनिक क्षमता का प्रदर्शन

अभ्यास से पहले रैम डिविजन ने विभिन्न युद्धाभ्यास ड्रिल्स और TTPs का परीक्षण किया। अभ्यास में

 • मैकेनाइज्ड यूनिट्स

 • पैदल सेना

 • इंजीनियरिंग टीमें

 • आर्मी एविएशन

ने एकीकृत मोर्चा संभालते हुए गतिशील युद्धक्षेत्र में अपना बेहतरीन तालमेल दिखाया।

अत्याधुनिक उपकरणों, ISR सिस्टम, AI आधारित निर्णय सहयोग प्रणाली और नेटवर्क-केंद्रित कमांड-कंट्रोल ने यह साबित किया कि भारतीय सेना जटिल तकनीक-प्रधान युद्धों के लिए पूरी तरह तैयार है।

“सेना का संदेश— भविष्य की ओर तेज कदम…

‘रैम प्रहार’ ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय सेना नवाचार, संयुक्त कार्रवाई और जनता के साथ मजबूत संबंधों के आधार पर एक भविष्य-उन्मुख, सक्षम और तेजी से विकसित होने वाली सेना है।यह अभ्यास भारत की उस दृढ़ क्षमता का प्रतीक है, जिसके बल पर राष्ट्र अपने हितों की रक्षा और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने में सक्षम है।

“Bhagwasanatantimes का सवाल — महिलाओं की भागीदारी कितनी…

“अभ्यास के बाद Bhagwasanatantimes के पत्रकार ने पूछा “ऑपरेशन सिंदूर में महिलाओं की बड़ी भागीदारी दिखी थी, लेकिन इस अभ्यास में महिला सैनिकों की भागीदारी कितनी है?”

“लेफ्टिनेंट जनरल कटियार ने जवाब दिया…

“महिलाओं की बहुत बड़ी भागीदारी है। कई महिला अधिकारी सपोर्ट आर्म्स, लॉजिस्टिक्स और अन्य इकाइयों में सक्रिय हैं। आपने जो फाइटिंग आर्म्स देखे, उनमें महिलाएँ कम दिखीं, लेकिन सेना में उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में हर ऑपरेशन में उनकी भागीदारी और बढ़ेगी।”

1.उपकरण कहां से आए?

उन्होंने बताया,“इस अभ्यास में अधिकतर स्वदेशी उपकरणों का उपयोग हुआ है। जो फ्लाइंग ड्रोन आपने देखे, वे सेना ने अपनी वर्कशॉप में खुद बनाए हैं। आत्मनिर्भरता में हम तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं और अपनी आवश्यकताओं को खुद पूरा करने में सक्षम होते जा रहे हैं।”

2. यदि दुश्मन भी यही तकनीक हासिल कर ले, तब क्या?

लेफ्टिनेंट जनरल कटियार ने स्पष्ट किया,

“जब हम नई तकनीक अपनाते हैं, तो यह भी सोचते हैं कि दुश्मन इसका कैसे उपयोग करेगा। AI आने से हमारी surveillance, decision-making और ऑपरेशनल सिस्टम्स की क्षमता कई गुना बढ़ी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने हमारी लड़ाकू क्षमता में बड़ा सुधार किया है।”

3. भविष्य की लड़ाई — “सिर्फ एक domain की नहीं होगी”

कटियार ने कहा,“हमारी तैयारी chemical, nuclear balance सहित हर क्षेत्र के लिए है। अगली लड़ाई multi-domain होगी — space, cyber, electronic warfare और information domain में भी।

लेकिन जीत हमेशा जमीन पर ही तय होगी।

1937 हो या 1965 — जब तक जमीन पर कब्ज़ा नहीं होता, दुश्मन मानता नहीं कि हम जीत गए। अंतिम लड़ाई हमेशा ground पर ही होती है।

4. पाकिस्तान बॉर्डर के भौगोलिक हालात के अनुसार ट्रेनिंग क्यों?

“एक अन्य प्रश्न पर उन्होंने विस्तृत स्पष्टीकरण दिया:

“हम जो भी exercise करते हैं, वह हमारी operational ज़रूरतों को ध्यान में रखकर करते हैं। पाकिस्तान की तरफ हमारा बॉर्डर कई नदियों से घिरा है — ऊपर की तरफ चिनाब है, फिर रावी है, फिर सतलुज है। यदि कभी पाकिस्तान पर offensive करना पड़े, तो river crossing स्वाभाविक रूप से शामिल होगी। इसलिए नदी पार कर दुश्मन के इलाके में कब्ज़ा करने की क्षमता हमारी ट्रेनिंग का अहम हिस्सा है।

हम जो भी ट्रेनिंग कर रहे हैं, वह बिल्कुल operational role के हिसाब से है। अब आप पूछेंगे कि यह Central Command के इलाके में क्यों हो रहा है — तो इसका कारण यह है कि हमारी नदियाँ ज्यादातर बॉर्डर के साथ बहती हैं, इसलिए ट्रेनिंग कहीं भी हो सकती है। कोई भी command हो, कोई भी क्षेत्र हो — operational ज़रूरतें नहीं बदलतीं, और हमें हर प्रकार की परिस्थितियों के लिए तैयार रहना होता है।”

By zeeshan

Zeeshan डिजिटल मीडिया से जुड़े युवा पत्रकार हैं। वे Bhagwasanatantimes.com के साथ कार्यरत हैं और राजनीति, समाज, धर्म और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। डिजिटल पत्रकारिता में उनकी गहरी रुचि है, और वे निष्पक्ष और तथ्यात्मक खबरों के लिए जाने जाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *