हरिद्वार:(चीफ एडिटर) आगामी स्वच्छ सर्वेक्षण 2026 में रैंकिंग सुधारने के लिए नगर निगम हरिद्वार एक्शन मोड में आ गया है।नगर आयुक्त नंदन कुमार की अध्यक्षता में नगर की स्वच्छता व्यवस्था और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर अहम समीक्षा बैठक हुई। बैठक का मुख्य फोकस बल्क वेस्ट जनरेटर्स के अनुपालन पर रहा।नगर आयुक्त ने सभी मुख्य सफाई निरीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित बल्क वेस्ट जनरेटर्स को निर्धारित प्रारूप पर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही उनका ऑनलाइन पंजीकरण सुनिश्चित कराने को कहा। स्पष्ट चेतावनी दी गई कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के तहत अपने स्तर पर गीले कचरे का निस्तारण न करने वाले बल्क वेस्ट जनरेटर्स के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एसबीएम विशेषज्ञ मनीष दुबे ने बताया कि जिन संस्थानों द्वारा प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस अपशिष्ट उत्पन्न किया जाता है, जिनका क्षेत्रफल 20,000 वर्गमीटर या उससे अधिक है, या जो प्रतिदिन 40,000 लीटर से अधिक जल का उपभोग करते हैं, उन्हें बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे सभी संस्थानों के लिए अपने परिसर में ही गीले कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण और ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य है।बैठक में स्वच्छ सर्वेक्षण के अंतर्गत गार्बेज फ्री सिटी (GFC) और वॉटर प्लस मानकों पर विस्तार से चर्चा हुई। नगर निगम की रैंकिंग में सुधार के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए। नगर आयुक्त ने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन के लिए हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी।
बैठक में नगर क्षेत्र की समग्र सफाई व्यवस्था और नाला सफाई कार्यों की भी समीक्षा की गई। सभी सफाई निरीक्षकों ने बताया कि उनके क्षेत्रों में अधिकांश नालों की एक से अधिक बार सफाई हो चुकी है। कुछ क्षेत्रों में निविदा के माध्यम से काम चल रहा है। नगर आयुक्त ने वर्षा ऋतु और आगामी आयोजनों को देखते हुए नालों की समयबद्ध सफाई को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
बैठक में उप नगर आयुक्त दीपक गोस्वामी, मुख्य सफाई निरीक्षक संजय शर्मा, अर्जुन सिंह, मनोज कुमार, धीरेंद्र सेमवाल, विकास झाझर, सुरेंद्र कुमार तथा एसबीएम विशेषज्ञ मनीष दुबे उपस्थित रहे।

