Breaking
30 Jul 2026, Thu

रमजान को तीन अशरो में बांटा गया है, जाने किस अशरे का क्या है महत्व?

दिल्ली:(जीशान मलिक)रमजान का महीना मुसलमानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जिसमें तीस या उनतीस दिनों तक रोजे रखे जाते हैं। इस्लाम के मुताबिक, पूरे रमजान को तीन हिस्सों में बांटा गया है, जो पहला, दूसरा और तीसरा अशरा कहलाता है।

“रमजान के तीन अशरे…

“1.पहला अशरा (रहमत का अशरा)… रमजान के पहले 10 दिन रहमत के होते हैं। इस दौरान रोजा-नमाज करने वालों पर अल्लाह की रहमत होती है। मुसलमानों को ज्यादा से ज्यादा दान कर के गरीबों की मदद करनी चाहिए और हर एक इंसान से प्यार और नम्रता का व्यवहार करना चाहिए।

“2.दूसरा अशरा (माफी का अशरा)… रमजान के 11वें रोजे से 20वें रोजे तक दूसरा अशरा चलता है। यह अशरा माफी का होता है। इस दौरान लोग इबादत कर के अपने गुनाहों से माफी पा सकते हैं। इस्लामिक मान्यता के मुताबिक, अगर कोई इंसान रमजान के दूसरे अशरे में अपने गुनाहों से माफी मांगता है, तो दूसरे दिनों के मुकाबले इस समय अल्लाह अपने बंदों को जल्दी माफ करता है।

“3.तीसरा अशरा (जहन्नुम से बचाव का अशरा)…रमजान का तीसरा और आखिरी अशरा 21वें रोजे से शुरू होकर चांद के हिसाब से 29वें या 30वें रोजे तक चलता है। ये अशरा सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। तीसरे अशरे का उद्देश्य जहन्नुम की आग से खुद को सुरक्षित रखना है। इस दौरान हर मुसलमान को जहन्नम से बचने के लिए अल्लाह से दुआ करनी चाहिए।

आपको बता दें कि रमजान के आखिरी अशरे में कई मुस्लिम मर्द और औरतें एहतफाक में बैठते हैं। एहतकाफ में मुस्लिम पुरुष मस्जिद के कोने में 10 दिनों तक एक जगह बैठकर अल्लाह की इबादत करते हैं, जबकि महिलाएं घर में रहकर ही इबादत करती हैं।

By zeeshan

Zeeshan डिजिटल मीडिया से जुड़े युवा पत्रकार हैं। वे Bhagwasanatantimes.com के साथ कार्यरत हैं और राजनीति, समाज, धर्म और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। डिजिटल पत्रकारिता में उनकी गहरी रुचि है, और वे निष्पक्ष और तथ्यात्मक खबरों के लिए जाने जाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *