Breaking
31 Jul 2026, Fri

ब्रेकिंग न्यूज़:अंकिता भंडारी हत्याकांड क़े 3 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा

देहरादून:(ज़ीशान मलिक)उत्तराखंड के कोटद्वार में करीब 3 साल पुराने अंकिता भंडारी हत्याकांड में कोर्ट का फैसला सामने आ चुका है. कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया है. अंकिता भंडारी का शव कैनाल से बरामद किया गया था. अब इस बहुचर्चित हत्याकांड में मामले में कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आज फैसला सुनाया है. कोर्ट ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है.

उत्तराखंड के कोटद्वार स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय में अंकिता की हत्या के मामले में तीन आरोपियों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी पाया गया है. कोर्ट ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. करीब दो साल और आठ महीने तक चली सुनवाई में 47 गवाहों ने कोर्ट में बयान दिए. इसके अलावा पूरे मामले में एसआईटी ने 97 गवाह बनाए थे, जिनमें से 47 अहम गवाहों को ही अदालत में पेश कराया गया.

क्या है अंकिता भंडारी मर्डर केस?
उत्तराखंड के ऋषिकेश के करीब पौड़ी जिले के गंगा भोगपुर इलाके में वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट का काम करने वाली 19 साल की अंकिता भंडारी का सितंबर 2022 में मर्डर कर दिया गया था. घटना के एक सप्ताह बाद चीला नहर से अंकिता शव बरामद हुआ था.इस मामले में उस समय पुलिस ने रिजॉर्ट मालिक संचालक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर व अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था. जांच में खुलासा हुआ था कि आरोपियों ने अंकिता को हत्यारोपियों ने चीला नहर में धक्का देकर मार डाला था.

अंकित मर्डर करने के पीछे की वजह रिजॉर्ट में वीआईपी को एक्स्ट्रा सर्विस देने से इनकार करना बताया गया था. इस घटना के बाद उत्तराखंड में भारी बवाल देखने को मिला था. बवाल के बाद उत्तराखंड सरकार ने जांच के लिए उप महानिरीक्षक पी रेणुका देवी के नेतृत्व में स्पेशल जांच टीम का गठन किया था.

जाने 32 महीनों में क्या-क्या हुआ?

अंकिता की हत्या के बाद आरोपियों को 24 घंटे के अंदर जेल भेजा गया और अभी तक वह सलाखों के पीछे हैं. अंकिता भंडारी हत्या मामले में जांच के लिए किया गया SIT का गठन किया गया था. इसके अलावा आरोपियों पर गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी केस दर्ज किया गया था. धामी सरकार की तरफ से अंकिता भंडारी के परिवार को ₹25 लाख की आर्थिक मदद दी गई थी.

पूरे मामले में 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई. अंकिता के परिजनों की मांग पर 3 बार सरकारी वकील बदले गए. इसके साथ ही अंकिता के भाई और उसके पिता को सरकारी नौकरी दी गई. कोर्ट में सरकारी वकील की तरफ से की गई सख्त पैरवी की वजह से आरोपियों द्वारा दी गई जमानत अर्जी हर बार खारिज हो गई.

By zeeshan

Zeeshan डिजिटल मीडिया से जुड़े युवा पत्रकार हैं। वे Bhagwasanatantimes.com के साथ कार्यरत हैं और राजनीति, समाज, धर्म और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। डिजिटल पत्रकारिता में उनकी गहरी रुचि है, और वे निष्पक्ष और तथ्यात्मक खबरों के लिए जाने जाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *