पिरान कलियर:(जीशान मलिक) दरगाह साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स के मुबारक मौके पर गुरुवार को कुल शरीफ की मुख्य रस्म बारिश के बीच बेहद अकीदत और रूहानियत भरे माहौल में अदा की गई। सुबह करीब 10:30 बजे शुरू हुई कुल शरीफ की रस्म में बारिश भी जायरीनों के कदम नहीं रोक सकी। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों अकीदतमंद दरगाह परिसर और आसपास के क्षेत्रों में डटे रहे और साबिर पाक की चौखट पर अपनी हाजिरी पेश की।कुल शरीफ के दौरान दरगाह परिसर में जायरीनों की भारी भीड़ के चलते जगह कम पड़ गई। आलम यह रहा कि बाजारों, गलियों और आसपास की सड़कों तक अकीदतमंदों का हुजूम नजर आया। बारिश लगातार होती रही, लेकिन जायरीनों की आस्था में कोई कमी नहीं आई। लोगों को जहां जगह मिली, वहीं खड़े होकर कुल शरीफ में शिरकत की और हाथ उठाकर दुआएं मांगीं।
महफिलखाने में सज्जादानशीन शाह अली ऐजाज साबरी ने कुल शरीफ की मुख्य रस्म अदा कराई। इस दौरान हजरत साबिर पाक का सजरा शरीफ पढ़ा गया। सजरा शरीफ और दुआ के दौरान पूरा माहौल रूहानी हो उठा। बड़ी संख्या में जायरीन भावुक नजर आए। कई अकीदतमंदों की आंखों से आंसू छलक पड़े और लोगों ने अपनी परेशानियों, मन्नतों और अरमानों को लेकर दरबारे साबरी में दुआएं कीं।किसी ने परिवार की सलामती के लिए हाथ उठाए तो किसी ने कारोबार, रोजगार और खुशहाली के लिए दुआ मांगी। वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने देश में अमन-ओ-अमान, भाईचारे, तरक्की और इंसानियत की सलामती की दुआ की। बारिश की बूंदों के बीच दरगाह परिसर से लेकर आसपास के बाजारों और सड़कों तक दुआओं की सदाएं सुनाई देती रहीं।
” बारिश बनी इम्तिहान, आस्था के आगे फीकी पड़ी मौसम की मार”
कुल शरीफ के दौरान बारिश ने एक ओर जायरीनों और प्रशासन के सामने चुनौती खड़ी की, वहीं दूसरी ओर अकीदतमंदों का जज्बा भी देखने को मिला। सिर पर छाता, शरीर पर बरसाती और कई लोग बिना किसी परवाह के बारिश में भी कुल शरीफ में शामिल होते नजर आए। मौसम की खराबी के बावजूद दरगाह पहुंचने वाले जायरीनों का सिलसिला जारी रहा।दरगाह परिसर में मौजूद अकीदतमंदों के चेहरों पर थकान से ज्यादा खुशी और दिल में साबिर पाक की चौखट पर पहुंचने की तसल्ली नजर आई। बारिश में भीगते हुए लोगों ने कुल शरीफ की रस्म में शिरकत की और दुआ के वक्त पूरी श्रद्धा के साथ हाथ उठाए।
“मुल्क की खुशहाली और इंसानियत की सलामती के लिए मांगी दुआ….
कुल शरीफ के समापन के बाद दुआ-ए-खैर का आयोजन किया गया। इस दौरान देश में अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे, खुशहाली और तरक्की के लिए विशेष दुआ की गई। लोगों ने मुल्क सहित पूरी इंसानियत की सलामती और दुनिया में शांति की दुआ मांगी।इस दौरान सज्जादानशीन शाह अली ऐजाज साबरी, साहिबजादा शाह यावर मियां और हाफिज सऊद साबरी सहित साबरी सज्जादा नशीन खानदान से जुड़े लोग मौजूद रहे। दुआ के दौरान बड़ी संख्या में जायरीन भावुक दिखाई दिए और दरगाह परिसर में रूहानी माहौल बना रहा।
“कव्वालियों से गूंज उठा दरबार, देर तक बंधा रहा रूहानी समां!!
कुल शरीफ के बाद महफिल-ए-समा का आयोजन किया गया। विभिन्न राज्यों से पहुंचे कव्वालों ने सूफियाना कलाम और कव्वालियां पेश कर समां बांध दिया। जैसे-जैसे कव्वालों ने अपने कलाम पेश किए, वैसे-वैसे जायरीनों की अकीदत भी परवान चढ़ती गई। लोग पूरी तल्लीनता के साथ कव्वाली सुनते नजर आए।महफिल-ए-समा के दौरान दरगाह परिसर में रूहानी माहौल देखने को मिला। जायरीन देर तक कव्वाली और सूफियाना कलाम का आनंद लेते रहे। इस दौरान साबरी खानदान से जुड़े कई लोग भी मौजूद रहे।
“गलियों से सड़कों तक दिखा जायरीनों का हुजूम”
कुल शरीफ के मौके पर पिरान कलियर की गलियां और बाजार अकीदतमंदों से चका चक भरे नजर आए। दरगाह परिसर में जगह कम पड़ने के बाद आसपास के क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में लोग दिखाई दिए। बारिश के बावजूद जायरीनों की भीड़ में उत्साह बना रहा।कुल शरीफ का यह नजारा पिरान कलियर की रूहानी फिजा में ऐसा रंग भर गया, जहां एक तरफ आसमान से बारिश की बूंदें बरस रही थीं, वहीं दूसरी तरफ हजारों हाथ दुआ के लिए उठे हुए थे। साबिर पाक की चौखट पर पहुंचे अकीदतमंदों ने मुल्क में अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ के साथ अपने-अपने परिवारों की सलामती की फरियाद भी पेश की।बारिश के बीच अदा हुआ 758वें उर्स का कुल शरीफ पिरान कलियर में अकीदत, रूहानियत और दुआओं का ऐसा नजारा छोड़ गया, जिसे जायरीन लंबे समय तक याद रखेंगे।

