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7 Jun 2026, Sun

पेरिस कम्यून: एक युगांतकारी घटना

हरिद्वार:(ज़ीशान मलिक)हरिद्वार में इंकलाबी मजदूर केंद्र के बैनर तले पेरिस कम्यून की याद में सुबह प्रभात फेरी निकाली गई और दोपहर में एक परिचर्चा की गई। इस अवसर पर पेरिस कम्यून के इतिहास और उसके महत्व पर चर्चा की गई।

18 मार्च 1871 को फ्रांस के पेरिस शहर पर मजदूरों ने कब्जा कर 72 दिन तक अपना राज कायम किया था। इस दौरान मजदूरों ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जैसे कि:

– सभी उद्योग मजदूर राज के अधीन कर दिए गए।

– मजदूरों, अधिकारियों, मंत्रियों की तनख्वाह लगभग बराबर कर दी गई।

– मजदूरों पर जुर्माना लगाने पर रोक लगाई गई।

– दलालों या एजेन्सियों पर जो मजदूरों का शोषण करते थे सख्ती से रोक लगा दी गयी।

– किसी भी मंत्री/अफसर को सीधे जनता चुनाव से चुनती थी तथा इनके भ्रष्ट होने पर जनता को वापिस बुलाने का अधिकार था।

लेकिन मजदूरों का राज ‘पेरिस कम्यून’ फ्रांस की लूटेरी सरकार को रास नहीं आया और पेरिस कम्यून को खून डूबोने के लिए दुश्मन वर्ग से (जर्मनी) से हाथ मिला कर हजारों मजदूरों को मौत के घाट उतार दिया गया।

“पेरिस कम्यून का महत्व…

पेरिस कम्यून ने दुनिया के मजदूरों को समाजवाद का रस्ता दिखाया और उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद दुनिया में क्रांतियों की लहर उमड़ पड़ी और उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष तेज होने लगे।

आज दुनिया में कहीं भी मजदूरों का राज नहीं है और पूंजीपति वर्ग मजदूरों के अधिकारों को छिनता जा रहा है। साम्राज्यवादी युद्ध थोप कर मज़दूर मेहनतकशों को बर्बाद किया जा रहा है। पेरिस कम्यून हमें याद दिलाता है कि दुनिया में शोषण-दमन का खात्मा करने के लिए समाजवादी क्रांति करने के लिए मेहनतकशों को एकजुट करना होगा।

By zeeshan

Zeeshan डिजिटल मीडिया से जुड़े युवा पत्रकार हैं। वे Bhagwasanatantimes.com के साथ कार्यरत हैं और राजनीति, समाज, धर्म और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। डिजिटल पत्रकारिता में उनकी गहरी रुचि है, और वे निष्पक्ष और तथ्यात्मक खबरों के लिए जाने जाते हैं।

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