
पिरान कलियर:(जीशान मलिक)विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक की सरजमीं पिरान कलियर एवं आसपास के ग्रामीण अंचलों में इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मोहर्रम की दसवीं तारीख यौम-ए-आशूरा पूरी अकीदत और एहतराम के साथ मनाई गई। रहमतपुर बेलडा, बढे़डी राजपूतान, मुकर्रबपुर, मेहवड़, धनौरी, इमलीखेड़ा, तेलीवाला, महमूदपुर समेत सभी गांवों में कर्बला के शहीदों की याद में मजलिसों का दौर चला और इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद कर खिराज-ए-अकीदत पेश की गई।


“सुबह से देर रात तक चला मजलिसों का सिलसिला”

मोहर्रम की दसवीं तारीख को भोर से ही अकीदतमंदों का हुजूम इमामबाड़ों, अजाखानों और दरगाह परिसर की तरफ उमड़ पड़ा।या हुसैन, या अब्बास’ की सदाओं के बीच अकीदत का माहौल रहा। छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में ‘या हुसैन’ और ‘या अली’ लिखे झंडे, परचम और अलम थे। घर-घर में औरतों ने मजलिसें सजाईं। मिंबरों से इमाम साहबों ने कर्बला के मैदान का वाकया बयान किया। इमाम हुसैन द्वारा जुल्म के खिलाफ हक की खातिर दी गई कुर्बानी का जिक्र कर लोगों को इंसानियत का पैगाम दिया गया। बुजुर्गों के साथ-साथ युवाओं ने भी धार्मिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए नौहाख्वानी में हिस्सा लिया।
“अखाड़ों का जोश, पारंपरिक फन का मुजाहिरा”
दोपहर बाद बढ़ेंडी राजपूतान, रहमतपुर बेलडा, मुकर्रबपुर से ताजियों के साथ पारंपरिक अखाड़े निकले। नौजवानों के अखाड़ों ने लाठी, तलवार, फरसा, बनेठी और आग के हैरतअंगेज करतब दिखाकर सभी को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। ढोल-नगाड़ों और ताशों की थाप पर अखाड़े के उस्तादों ने अपना सालों पुराना फन दिखाया। ‘अली-अली’ और ‘हुसैन-हुसैन’ के नारों के बीच नौजवानों ने एक से बढ़कर एक करतब दिखाए। सड़क के दोनों ओर खड़े हजारों लोगों ने अखाड़ों के जौहर की दाद दी। यह परंपरा कर्बला के शहीदों की बहादुरी की याद दिलाती है। पिरान कलियर और रहमतपुर बेलडा का साबरी अखाड़ा आकर्षण का केंद्र रहा।
यौम-ए-आशूरा के मौके पर पिरान कलियर क्षेत्र में इंसानियत और खिदमत का जज्बा भी देखने को मिला। विभिन्न सामाजिक संगठनों, अंजुमनों और स्थानीय लोगों की ओर से जगह-जगह लंगर तकसीम किया गया। अकीदतमंदों ने भीषण गर्मी में राहगीरों को जगह-जगह रूहअफजा पिलाया। ताजियों के जुलूस के पूरे रूट पर स्टॉल लगाए गए थे। इन स्टॉलों पर सेब, केले, आम, कोल्ड ड्रिंक एवं खाना तकसीम किया गया। इमामबाड़ों के बाहर पानी, शरबत और तबर्रुक बांटा गया। दरगाह साबिर पाक के आसपास भी लंगर का व्यापक इंतजाम था। हर मजहब के लोगों ने खिदमत में हिस्सा लेकर भाईचारे की मिसाल पेश की।
“शाम को निकला ताजियों का शाही जुलूस”
असर की नमाज के बाद विभिन्न इमामबाड़ों से सजे-धजे ताजियों के जुलूस निकाले गए। ‘या हुसैन’ की सदाओं के बीच अकीदतमंद अकीदत के साथ ताजियों के साथ चले। औरतों और बच्चों ने घरों की छतों व बालकनी से ताजियों पर गुलाब के फूल बरसाए। जुलूस में अलम, तुर्बत और झूले भी शामिल थे। पूरे इलाके में अकीदत और एहतराम का माहौल था।ताजियों को स्थानीय कर्बला में ले जाकर सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान ‘अलविदा, अलविदा या हुसैन’ की सदाएं गूंजीं।
मोहर्रम के मद्देनजर पिरान कलियर थाना पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर थी। थानाध्यक्ष पिरान कलियर के नेतृत्व में कलियर चौकी प्रभारी समेत भारी पुलिस बल सुबह से ही जुलूस के रूट पर तैनात रहा। संवेदनशील स्थानों पर पीएसी के जवान भी लगाए गए थे। ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की गई। पुलिस अधिकारियों ने पैदल गश्त कर पल-पल की स्थिति का जायजा लिया। त्योहार आपसी भाईचारे, सौहार्द और शांति के माहौल में संपन्न हुआ। स्थानीय लोगों ने पुलिस-प्रशासन का पूरा सहयोग किया।

