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3 Aug 2026, Mon

देश की पहली ‘Land Border District SPs Conference-2026’ नई दिल्ली में सम्पन्न, उत्तराखण्ड पुलिस ने रखा अपना मॉडल 

नई दिल्ली/ देहरादून:(जीशान मलिक) देश की सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बुधवार को नई दिल्ली में देश की पहली _‘Land Border District SPs Conference-2026’_ का आयोजन किया गया।इस आयोजित सम्मेलन में देश के 18 सीमावर्ती राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों एवं अन्य केन्द्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख, सीमा सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी तथा सीमावर्ती जनपदों के पुलिस अधीक्षक शामिल हुए।

उत्तराखण्ड से पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ_ के साथ नेपाल और तिब्बत-चीन से जुड़े राज्य के पांच सीमावर्ती जनपदों ऊधमसिंहनगर, पिथौरागढ़, चम्पावत, उत्तरकाशी एवं चमोली — के पुलिस अधीक्षकों ने प्रतिभाग किया। गृह सचिव उत्तराखण्ड शासन शैलेश बगोली, महानिदेशक अभिसूचना एवं सुरक्षा अभिनव कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने ऑनलाइन भागीदारी की।सम्मेलन में सीमा-पार आतंकवाद एवं संगठित अपराध, सीमा सुरक्षा, वित्तीय अपराध एवं अवैध धन प्रवाह, सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन तथा सीमा विकास में सामुदायिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। 

उत्तराखण्ड पुलिस ने आधुनिक तकनीक आधारित सीमा निगरानी, सीमा-पार अपराधों की रोकथाम, स्थानीय खुफिया तंत्र को सुदृढ़ बनाने, सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से संबंधित सुझाव साझा किए।सम्मेलन के ‘Community Engagement for Border Development’ सत्र में पुलिस अधीक्षक चम्पावत रेखा यादव_ ने उत्तराखण्ड पुलिस के जन-केंद्रित पुलिसिंग मॉडल पर प्रस्तुति दी। उन्होंने सीमांत सुरक्षा को मजबूत करने के लिए _‘Five Pillars of Community Force Multiplication’_ — विश्वास, सूचना, सहभागिता, क्षमता निर्माण तथा प्रोत्साहन एवं संरक्षण — की अवधारणा रखी।

इस दौरान सीमांत क्षेत्रों में नियमित ‘रात्रि चौपाल’ पहल के सकारात्मक परिणाम बताए गए। साथ ही पिथौरागढ़ के सीमांत क्षेत्र में विकसित _‘गुंजी मॉडल’_ को रिवर्स माइग्रेशन का सफल उदाहरण बताया गया।गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केन्द्र सरकार ‘स्मार्ट बॉर्डर’ की अवधारणा के तहत सुरक्षा बलों, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के समन्वय से मजबूत सुरक्षा तंत्र विकसित कर रही है। अगले तीन वर्षों में नशीले पदार्थों की तस्करी पर नियंत्रण और देश को घुसपैठ से मुक्त बनाने की तैयारी है। प्रधानमंत्री के ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत सीमांत गांवों में पलायन रोकने और रोजगार बढ़ाने पर फोकस है।पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने कहा कि यह सम्मेलन सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, समन्वित एवं जन-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सम्मेलन में साझा किए गए अनुभव और नवाचार सीमांत क्षेत्रों में सुरक्षा, विकास तथा नागरिक सहभागिता को सुदृढ़ करने में उपयोगी होंगे।

By zeeshan

Zeeshan डिजिटल मीडिया से जुड़े युवा पत्रकार हैं। वे Bhagwasanatantimes.com के साथ कार्यरत हैं और राजनीति, समाज, धर्म और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। डिजिटल पत्रकारिता में उनकी गहरी रुचि है, और वे निष्पक्ष और तथ्यात्मक खबरों के लिए जाने जाते हैं।

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