
हरिद्वार:हरिद्वार में महिला ASI को 10 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किए जाने के बाद जनता के मन में कई सवाल उठ रहे हैं।क्या केवल छोटे कर्मचारियों की गिरफ्तारी से भ्रष्टाचार की जड़ें खत्म हो जाएंगी?


क्या एक ASI अपने स्तर पर ही ऐसे मामलों में इतना बड़ा फैसला ले सकती है, या मामले की जांच में किसी अन्य अधिकारी की भूमिका भी सामने आ सकती है?अगर इस मामले में कोई अन्य कर्मचारी या अधिकारी शामिल है, तो क्या विजिलेंस जांच उस तक भी पहुंचेगी?

पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया क्या है? क्या जांच केवल रिश्वत लेते पकड़े गए कर्मचारी तक सीमित रहेगी या पूरे मामले की तह तक जाएगी?सबसे बड़ा सवाल—अगर जांच में किसी वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका सामने आती है, तो क्या उसके खिलाफ भी वैसी ही कार्रवाई होगी?
जनता जानना चाहती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई केवल रिश्वत लेते पकड़े जाने वाले कर्मचारी तक सीमित रहेगी या उन सभी लोगों की जवाबदेही भी तय होगी, जिनकी भूमिका जांच में सामने आएगी।यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इस मामले में किसी अन्य अधिकारी की संलिप्तता का फिलहाल कोई पुष्ट तथ्य सामने नहीं है। इसलिए जरूरी है कि विजिलेंस निष्पक्ष जांच करे और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करे।
जनता को केवल गिरफ्तारी की खबर नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की पूरी सच्चाई जानने का भी अधिकार है।अब सवाल हरिद्वार विजिलेंस और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से है—क्या इस मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होगी और दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जवाबदेही तय की जाएगी?
भगवा सनातन टाइम्स पूछता है—भ्रष्टाचार की जड़ पर प्रहार कब?
सच दिखाना। सवाल उठाना। बदलाव लाना।

