गांव का प्रधान बना मिसाल — युवाओं में जगी नई सोच की चिंगारी
हरिद्वार,भगवा सनातन टाइम्स
उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में 5 अगस्त 2025 को घटित बादल फटने की भयावह आपदा ने जहां पूरे प्रदेश को हिला दिया, वहीं इस त्रासदी में जान-माल के भारी नुकसान ने जनमानस को भीतर तक झकझोर कर रख दिया।
इसी संवेदनशील और दहला देने वाली घड़ी में एक युवा चेहरा— मित्र युवा ग्राम प्रधान अजीतपुर, प्रखर कश्यप— सामने आया, जिन्होंने इंसानियत और सेवा की मिसाल पेश करते हुए ऐसा कदम उठाया जिसे सुनकर हर कोई चौंक गया।
बिल्कुल गुप्त तरीके से, उन्होंने जिलाधिकारी हरिद्वार को एक पत्र सौंपा— एक ऐसा पत्र, जो सिर्फ कागज़ नहीं, बल्कि संवेदना, त्याग और जज़्बे की मिसाल है।इस पत्र में प्रखर कश्यप ने मुख्यमंत्री राहत कोष में अपने पांच माह का मानदेय दान करने की बात कही है।
उन्होंने लिखा—“धराली की यह घटना अत्यंत दुखद व व्यथित करने वाली है। राहत व बचाव कार्यों में जुटे लोगों को सहयोग देना अब मेरा भी कर्तव्य है। कृपया मेरा पाँच माह का मानदेय मुख्यमंत्री राहत कोष में अर्पित करने की कृपा करें।”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चल रहे आपदा राहत कार्यों की उन्होंने सराहना की और यह भी जताया कि यह समय साथ खड़े होने का है, न कि किनारे खड़े तमाशा देखने का।
अब हर कोई पूछ रहा है— क्या यही है नए उत्तराखंड की नई युवा तस्वीर?
“जब युवा नेतृत्व खुद आगे आता है, तो बदलाव नज़दीक लगता है।” – हरिद्वार निवासी
क्या यह साहसिक कदम औरों को भी प्रेरित करेगा?
आगामी कुछ दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अन्य जनप्रतिनिधि भी इसी तरह आगे आएंगे या प्रखर कश्यप अकेले ही इस मोर्चे पर डटे रहेंगे।
अब प्रदेश में यह चर्चा गर्म है — क्या यह पहल और जनप्रतिनिधियों को प्रेरित करेगी?
क्या अब हम प्रचार से नहीं, प्रत्यक्ष सेवा से राजनीति के असली स्वरूप को देख पाएंगे?
“जो मंच नहीं, मंज़िलों के लिए चले — वही असली नेता होता है।”

