Breaking
29 Oct 2026, Thu

खेल परिसरों के नाम बदलने के प्रस्ताव पर विधायक रवि बहादुर की आपत्ति, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

खेल परिसरों के नाम बदलने के प्रस्ताव पर विधायक रवि बहादुर की आपत्ति, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

राज्य की भावना और खिलाड़ियों के सम्मान से जुड़ा मामला अब बना राजनीतिक चर्चा का विषय

हरिद्वार:भगवा सनातन टाइम्स

ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक इंजीनियर रवि बहादुर ने उत्तराखंड के खेल परिसरों के नामों में बदलाव के प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि इन परिसरों के नामों को वर्तमान स्वरूप में ही बनाए रखा जाए, क्योंकि ये नाम न केवल राज्य के खिलाड़ियों की उपलब्धियों से जुड़े हैं, बल्कि आम जनता की भावनाओं का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।

पत्र में विधायक ने उल्लेख किया कि राज्य सरकार द्वारा खेल परिसरों के नामों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, हालांकि खेल विभाग की ओर से यह स्पष्टीकरण दिया गया है कि स्टेडियमों के नामों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, बल्कि पूरे खेल परिसर को एक विशेष नाम देने की बात कही गई है। बावजूद इसके, रवि बहादुर ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए इसे जनभावनाओं के खिलाफ बताया।

विधायक ने पत्र में राज्य के प्रमुख खेल परिसरों के उदाहरण देते हुए लिखा:

•देहरादून में स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज, जिसमें राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सोसाइटी है। महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास के वीर प्रतीक हैं और राजीव गांधी देश के पूर्व प्रधानमंत्री व भारत रत्न हैं।

•हल्द्वानी के तारुणताल गौलापार खेल परिसर में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हॉकी ग्राउंड स्थित है, जिनका योगदान देश के इतिहास में अमिट है।

•रुद्रपुर का मनोज सरकार स्टेडियम पैरालंपिक पदक विजेता खिलाड़ी के नाम पर है, जो राज्य के लिए गर्व का विषय हैं।

•हरिद्वार का वंदना कटारिया हॉकी स्टेडियम, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली खिलाड़ी के नाम पर है। वंदना कटारिया न केवल एक सफल महिला खिलाड़ी हैं, बल्कि दलित समाज से आने के कारण समाजिक सशक्तिकरण की प्रतीक भी हैं।

विधायक ने स्पष्ट किया कि इन नामों को बदलना सिर्फ प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि राज्य की पहचान और प्रेरणा से जुड़े मूल्यों पर असर डाल सकता है।

पत्र के अंत में रवि बहादुर ने मुख्यमंत्री से अपील की कि राज्य की सांस्कृतिक और खेल विरासत का सम्मान करते हुए सभी खेल परिसरों के नामों को यथावत रखा जाए।

इस मुद्दे ने अब राज्य की राजनीति और खेल जगत में नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां जनप्रतिनिधि और नागरिक राज्य की गौरवशाली पहचान को संरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *