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21 Apr 2026, Tue

ऑक्सीजन प्लांट, सीटी स्कैन, विशेषज्ञ डॉक्टरों और मातृ-स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी से संकट में लाखों की जिंदगी

 

अल्मोड़ा:(ज़ीशान मलिक)उत्तराखंड – एक ओर जहां सरकार “स्वस्थ उत्तराखंड” के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं की दयनीय स्थिति ने पर्वतीय क्षेत्र की जनता को निराशा, असहायता और संकट के गर्त में धकेल दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता संजय पांडे ने इस गंभीर स्थिति को लेकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए चेताया कि यदि सात दिनों के भीतर सुधार नहीं हुआ तो जनआंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

ऑक्सीजन प्लांट निष्क्रिय, मरीज हल्द्वानी-रुद्रपुर जाने को मजबूर

मेडिकल कॉलेज में वर्षों पहले स्थापित ऑक्सीजन प्लांट और हाल में लगे बूस्टर उपकरण के बावजूद स्थानीय मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर रिफिलिंग के लिए हल्द्वानी या रुद्रपुर भेजा जा रहा है। पांडे ने इसे “जनता के साथ क्रूर मजाक” बताते हुए कहा कि यह लापरवाही कई गंभीर मरीजों की जान पर भारी पड़ सकती है। उन्होंने इस संदर्भ में महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत भी दर्ज कराई है।

हफ्तों से बंद सीटी स्कैन मशीन, गंभीर रोगियों के लिए संकट

कॉलेज की सीटी स्कैन मशीन लंबे समय से खराब है। हृदय, मस्तिष्क और कैंसर जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को जांच के लिए निजी अस्पतालों या अन्य शहरों का रुख करना पड़ रहा है। यह न केवल आर्थिक बोझ है, बल्कि कई बार समय की देरी जानलेवा साबित होती है।

गर्भवती महिलाओं को अनावश्यक रेफर, मातृ-स्वास्थ्य पर सीधा हमला

संजय पांडे ने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज में गर्भवती महिलाओं को मामूली कारणों से हल्द्वानी रेफर किया जा रहा है। “यह न सिर्फ असंवेदनशीलता है, बल्कि महिला एवं शिशु स्वास्थ्य के अधिकारों का उल्लंघन है,” उन्होंने कहा।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी, इलाज की उम्मीद टूट रही

मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, नेफ्रोलॉजिस्ट और यूरो सर्जन जैसे विशेषज्ञों की नियुक्ति अब तक नहीं हुई है। पहाड़ी क्षेत्रों में हृदय रोग और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं आम हैं, ऐसे में यह कमी लोगों को मौत के मुंह में धकेल रही है।

दवा वितरण काउंटर छोटा, मरीजों की लंबी कतारें

कॉलेज के दवा वितरण केंद्र की अव्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। मरीजों को घंटों लाइन में लगकर दवाएं लेनी पड़ती हैं, जिससे वृद्ध, महिलाएं और गंभीर रोगी खासे परेशान हैं।

मंत्री दौरे के समय खामोश रहे अधिकारी और जनप्रतिनिधि

हाल ही में जब उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री कॉलेज दौरे पर आए, उस समय जिलाधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी इन ज्वलंत मुद्दों को उनके सामने नहीं उठाया। पांडे ने इसे “साफ-साफ प्रशासनिक उदासीनता और जनविरोधी चुप्पी” करार दिया।

संजय पांडे की 5 सख्त मांगें, प्रशासन को 7 दिन का अल्टीमेटम
1. ऑक्सीजन प्लांट और बूस्टर का 24×7 संचालन तत्काल शुरू हो।
2. सीटी स्कैन मशीन की तुरंत मरम्मत या प्रतिस्थापन किया जाए।
3. गंभीर मामलों को छोड़कर गर्भवती महिलाओं की रेफरिंग पर रोक लगे।
4. विशेषज्ञ डॉक्टरों की त्वरित नियुक्ति सुनिश्चित हो।
5. दवा वितरण प्रणाली का विस्तार और व्यवस्थित संचालन किया जाए।

उन्होंने मांग की कि इन सभी बिंदुओं पर लिखित रिपोर्ट आमजन और संबंधित अधिकारियों को सार्वजनिक की जाए।

“यह सिर्फ एक लड़ाई नहीं है, यह हमारे पहाड़ के लोगों की जिंदगी और भविष्य का सवाल है। अगर सात दिनों में प्रशासन ने जवाब नहीं दिया, तो हम शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक जनआंदोलन शुरू करेंगे,” — संजय पांडे

यह रिपोर्ट उन पहाड़ी इलाकों की गूंगी चीख है, जो दशकों से उपेक्षा के शिकार रहे हैं। क्या प्रशासन जागेगा, या एक और आंदोलन की आंधी उत्तराखंड की फिजाओं में उठेगी?

By zeeshan

Zeeshan डिजिटल मीडिया से जुड़े युवा पत्रकार हैं। वे Bhagwasanatantimes.com के साथ कार्यरत हैं और राजनीति, समाज, धर्म और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। डिजिटल पत्रकारिता में उनकी गहरी रुचि है, और वे निष्पक्ष और तथ्यात्मक खबरों के लिए जाने जाते हैं।

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