उत्तराखंड की भोजनमाताओं ने 2 फरवरी 2026 को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राज्यव्यापी हड़ताल की। हड़ताल में हरिद्वार जिले के छह ब्लॉकों की भोजनमाताएं शामिल रहीं। हड़ताल के चलते भोजनमाताओं ने स्कूलों में कामकाज ठप रखा और विकास भवन रोशनाबाद पहुंचकर जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना दिया। इसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया।
धरना-सभा को संबोधित करते हुए यूनियन की कोषाध्यक्ष नीता ने कहा कि उत्तराखंड की हजारों मिड-डे-मील वर्कर (भोजनमाता) वर्षों से बेहद कम मानदेय, अतिरिक्त कार्यभार, मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न और प्रशासनिक उपेक्षा झेल रही हैं। सरकार द्वारा घोषित 5 हजार रुपये मानदेय आज तक लागू नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों में भोजनमाताओं से उनके कार्यक्षेत्र से बाहर कक्षाओं व मैदान की सफाई, चौकीदारी, माली और अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों जैसे कार्य कराए जा रहे हैं।
भेल मजदूर ट्रेड यूनियन के महामंत्री अवधेश ने कहा कि कई विद्यालयों में गैस चूल्हा, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। भोजनमाताओं को स्कूल खुलने से लेकर बंद होने तक उपस्थित रहना पड़ता है और विरोध करने पर काम से हटाने की धमकी व अभद्र टिप्पणियां की जाती हैं। छुट्टी जैसी सुविधाएं भी उन्हें नहीं मिलतीं।
क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के नासिर अहमद ने कहा कि एक ओर सरकार समान नागरिक संहिता जैसे कानूनों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर न्यूनतम वेतन में भारी असमानता बरती जा रही है। बढ़ती महंगाई के बीच मजदूर वर्ग के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।
इंकलाबी मजदूर केंद्र के हरिद्वार प्रभारी पंकज ने कहा कि जहां करीब 25 हजार भोजनमाताएं बदहाल स्थिति में हैं, वहीं जनप्रतिनिधियों के वेतन-भत्तों में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ही देश में इतनी गहरी असमानता और अन्याय क्यों है।
सभा में वक्ताओं ने महिला सशक्तिकरण के दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिला कर्मचारियों की जायज मांगों को अनसुना किया जा रहा है।
यूनियन की कार्यकारिणी सदस्य ललिता ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते भोजनमाताओं की मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
मुख्य मांगें इस प्रकार हैं—
- सरकार द्वारा घोषित 5 हजार रुपये मानदेय तत्काल लागू किया जाए।
- भोजनमाताओं से अतिरिक्त कार्य कराना बंद किया जाए।
- न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये लागू किया जाए।
- स्कूलों में रसोई, गैस, पानी और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की जाए।
- उत्पीड़न, शोषण व अभद्र व्यवहार पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
- भोजनमाताओं को सम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व प्रदान किया जाए।
हड़ताल में ललिता, पूनम, मीनाक्षी, सीमा, नीता सहित सैकड़ों भोजनमाताएं शामिल रहीं। आंदोलन के समर्थन में क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, इंकलाबी मजदूर केंद्र, भेल मजदूर ट्रेड यूनियन, देवभूमि श्रमिक संगठन सहित कई श्रमिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।


