Alcohol and Cancer: भारत में बढ़ते मामलों पर विशेषज्ञों की चेतावनी | जानिए शराब से होने वाले कैंसर के लक्षण, कारण और बचाव के तरीके
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भारत में शराब से जुड़े कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि शराब का सेवन 20 से अधिक प्रकार के कैंसर के खतरे को बढ़ाता है, जिनमें स्तन, लिवर और कोलन कैंसर प्रमुख हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने शराब की बोतलों पर कैंसर चेतावनी लेबल लगाने की सिफारिश की है और स्पष्ट किया है कि शराब की कोई भी मात्रा सुरक्षित नहीं है।
शराब और कैंसर के बीच संबंध
सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली के वैस्कुलर इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. पुनीत गर्ग बताते हैं, “शराब के सेवन से 20 से अधिक प्रकार के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।” इनमें मुख्य रूप से मुंह, गला, भोजन नली, पेट, कोलन, मलाशय, अग्न्याशय, स्तन (महिलाओं में) और प्रोस्टेट (पुरुषों में) कैंसर शामिल हैं।
तो शराब कैंसर को कैसे बढ़ावा देती है? एम्स भुवनेश्वर के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तराप्रसाद त्रिपाठी बताते हैं, “जब शराब मेटाबोलाइज़ होती है, तो यह एसिटाल्डिहाइड में परिवर्तित हो जाती है—एक जहरीला यौगिक जो डीएनए और प्रोटीन को नुकसान पहुंचाता है, जिससे कैंसर शुरू करने वाली उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) होती है।” इसके अलावा, शराब शरीर की जरूरी पोषक तत्वों जैसे फोलेट, विटामिन A, C, D और E को अवशोषित करने की क्षमता को भी कम कर देती है, जो कोशिका स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं।
चौंकाने वाले आंकड़े
WHO के अनुसार, वैश्विक स्तर पर लगभग 4% कैंसर के मामले शराब के सेवन से जुड़े हुए हैं। द लांसेट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 2020 में भारत में लगभग 62,100 नए कैंसर मामलों के लिए शराब जिम्मेदार थी।
इस बढ़ती चिंता को देखते हुए अमेरिका के सर्जन जनरल विवेक मूर्ति ने शराब की बोतलों पर कैंसर चेतावनी लेबल जोड़ने की सिफारिश की है। यह उपभोक्ताओं को जागरूक करने और शराब से होने वाले खतरों को समझने में मदद कर सकता है।
शराब से कमजोर होती प्रतिरक्षा प्रणाली
केवल डीएनए को नुकसान पहुंचाने के अलावा, लंबे समय तक शराब पीने से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है, जिससे यह कैंसर कोशिकाओं से लड़ने की क्षमता खो देता है। डॉ. त्रिपाठी चेतावनी देते हैं कि शराब से जुड़े कैंसर के कई लक्षण शुरू में हल्के हो सकते हैं, लेकिन उन्हें जल्द पहचानने से जान बचाई जा सकती है।
शराब से जुड़े कैंसर के चेतावनी संकेत:
- मुंह और गले का कैंसर: लगातार घाव, अनपेक्षित रक्तस्राव, निगलने में कठिनाई, लंबे समय तक गले में खराश।
- भोजन नली (इसोफेगस) का कैंसर: निगलने में परेशानी, सीने में दर्द, अचानक वजन घटाव, लगातार खांसी और आवाज में बदलाव।
- लिवर कैंसर: पेट में सूजन, पीलिया (त्वचा और आंखों में पीलापन), भूख में कमी, लगातार थकान।
- स्तन कैंसर: स्तन या बगल में गांठ, स्तन के आकार या बनावट में बदलाव, निप्पल से असामान्य स्त्राव।
जल्दी पहचान से बचाव संभव
विशेषज्ञों का मानना है कि जल्दी पहचान से इलाज अधिक प्रभावी हो सकता है। डॉ. गर्ग बताते हैं, “यदि कैंसर का जल्दी पता चल जाए, तो इलाज सफल होने की संभावना अधिक होती है। लेकिन यदि यह शरीर के अन्य अंगों—जैसे मस्तिष्क, फेफड़े, हृदय, किडनी, या लिवर—में फैल जाता है, तो इसे ठीक करना मुश्किल हो जाता है।”
क्या किया जा सकता है?
- शराब का सेवन कम करें: WHO के अनुसार, शराब की कोई भी मात्रा पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
- नियमित जांच करवाएं: हाई-रिस्क वाले लोगों को नियमित मेडिकल चेकअप करवाना चाहिए।
- लक्षणों को नज़रअंदाज न करें: यदि कोई असामान्य लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
विशेषज्ञों का कहना है कि रोकथाम इलाज से बेहतर है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर, जागरूक रहकर और शुरुआती चेतावनी संकेतों पर ध्यान देकर शराब से जुड़े कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है।
अब सवाल यह है कि क्या शराब की बोतलों पर चेतावनी लेबल पर्याप्त होंगे, या इस समस्या से निपटने के लिए एक व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान की जरूरत है?

