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6 Jun 2026, Sat

क्या आपकी बेटी भी है निशाने पर? इंस्टाग्राम से हो रहा था धर्मांतरण का जाल!

क्या आपकी बेटी भी है निशाने पर? इंस्टाग्राम से हो रहा था धर्मांतरण का जाल!

देहरादून,भगवा सनातन टाइम्स

उत्तराखंड की शांत वादियों में एक साजिश लंबे समय से पनप रही थी—एक साजिश जो धर्म की आड़ में मासूम युवतियों की सोच और पहचान को बदलने की कोशिश कर रही थी। लेकिन अब इस पर पुलिस की पैनी निगाह पड़ चुकी है, और पर्दाफाश के साथ ही पूरे राज्य में सनसनी फैल गई है।

 

सब कुछ तब शुरू हुआ जब 17 जुलाई को उत्तर प्रदेश ATS ने देहरादून पुलिस से गुप्त रूप से संपर्क साधा। एक चौंकाने वाली जानकारी साझा की गई—आगरा में पंजीकृत धर्मांतरण केस की डोरें देहरादून तक जुड़ती दिख रही थीं। खासकर शंकरपुर, सहसपुर का एक युवक अब्दुल रहमान इस पूरे जाल का अहम किरदार निकला।

एसएसपी देहरादून के निर्देश पर तुरंत एसपी देहात की निगरानी में एक विशेष टीम का गठन किया गया। उत्तराखंड STF की टेक्निकल टीम को भी इस मिशन में जोड़ा गया। निगाहें टिकी थीं एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर—इंस्टाग्राम।

संदिग्ध इंस्टाग्राम अकाउंट्स की लगातार मॉनिटरिंग के बाद टीम को एक युवती की ID पर फोकस मिला, जो देहरादून के रानीपोखरी क्षेत्र की रहने वाली थी। जांच में पता चला कि यह युवती अब्दुल रहमान और उसके साथियों के सीधे संपर्क में थी। पूछताछ में युवती से मिली जानकारियां चौंका देने वाली थीं—कैसे ऑनलाइन बातचीत के जरिये उसकी सोच को बदला जा रहा था और उसे धर्मांतरण के लिए प्रेरित किया जा रहा था।

लेकिन असल कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

जब यह सारा मामला युवती के पिता राजकुमार बजाज तक पहुंचा, तो उन्होंने खुद आगे आकर पूरी सच्चाई पुलिस को बताई—कैसे कुछ मुस्लिम युवक और एक महिला उसकी बेटी को धर्म बदलने के लिए मजबूर कर रहे थे। उनकी शिकायत के आधार पर थाना रानीपोखरी में उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया।

अब तक की जांच में पांच आरोपियों की पहचान हो चुकी है और इनके खिलाफ धर्मांतरण के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस की टीमें उत्तर प्रदेश, गोवा और दिल्ली के संभावित ठिकानों पर भेजी जा चुकी हैं, जहां अन्य संदिग्ध अकाउंट्स से युवती का संपर्क मिला था।

इस पूरे मामले में देहरादून पुलिस के साथ STF और यूपी ATS की संयुक्त प्रेस वार्ता में बताया गया कि सिर्फ धर्मांतरण ही नहीं, बल्कि अवैध फंडिंग की आशंका भी सामने आ रही है, जिसकी अलग से जांच शुरू हो चुकी है।

एक सवाल अब हर किसी के मन में है—क्या यह केवल एक मामला है, या कहीं और भी मासूम युवतियां इस जाल में फंस चुकी हैं?

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