
देहरादून:(ज़ीशान मलिक)बड़ी खबर उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं तो खत्म हो गईं, लेकिन अब शुरू होने जा रहा है वह दौर, जो लाखों छात्रों की किस्मत तय करेगा—उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन। 21 मार्च से 4 अप्रैल तक चलने वाली इस प्रक्रिया में हर कॉपी की जांच बारीकी से होगी या जल्दबाजी में अंक दिए जाएंगे? यही सवाल छात्रों और अभिभावकों के मन में घूम रहा है।


इस बार 662189 उत्तर पुस्तिकाओं को जांचने के लिए 4500 शिक्षक-शिक्षिकाओं की ड्यूटी लगाई गई है। लेकिन क्या यह संख्या पर्याप्त होगी? हर शिक्षक को एक कॉपी जांचने के लिए मात्र 40 मिनट का समय मिलेगा। यानी, अगर शिक्षक बिना रुके लगातार मूल्यांकन करें, तो भी वे एक दिन में सिर्फ 11 कॉपियां और पूरे 14 दिन में अधिकतम 147 कॉपियां ही जांच पाएंगे।

क्या जल्दबाजी में कटेंगे अंक?
हर साल बोर्ड परीक्षाओं के बाद छात्रों को सबसे ज्यादा डर मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर होता है। कहीं जल्दबाजी में नंबर काट न दिए जाएं? कहीं मेहनत का सही फल न मिले? इस बार भी यही सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि मूल्यांकन पूरी सावधानी और निष्पक्षता से किया जाएगा। लेकिन क्या वास्तव में हर कॉपी को पूरा समय मिलेगा?
शिक्षकों को कितना मिलेगा मेहनताना?
शिक्षकों को मूल्यांकन कार्य के लिए हाईस्कूल की प्रति कॉपी ₹10 और इंटरमीडिएट की प्रति कॉपी ₹14 दिए जाएंगे। सवाल यह है कि क्या यह मानदेय शिक्षकों को प्रेरित करेगा कि वे पूरे ध्यान और ईमानदारी से मूल्यांकन करें?
अब छात्रों की नजरें टिकीं…
उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाएं 1245 केंद्रों में आयोजित हुई थीं, जिनमें 133688 छात्र हाईस्कूल और 109699 छात्र इंटरमीडिएट में पंजीकृत हुए थे। अब इन लाखों छात्रों की नजरें 21 मार्च से शुरू होने वाले इस मूल्यांकन कार्य पर टिकी हैं। क्या सभी कॉपियां निष्पक्ष रूप से जांची जाएंगी? क्या कोई जल्दबाजी में नंबर काटेगा? या फिर इस बार बोर्ड अपना वादा निभाएगा और हर उत्तर पुस्तिका को पूरा समय मिलेगा?
14 दिन बाद क्या होगा? छात्रों को पूरे नंबर मिलेंगे या कुछ छूट जाएंगे? इसका जवाब जल्द ही सामने आएगा…
