हरिद्वार:(भगवा सनातन टाइम्स संवाददाता)हरिद्वार सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने लोकसभा में वन संपदा के महत्व पर जोर दिया। सरकार के अनुसार, 2024-25 में वानिकी और वन उत्पादों का GVA में 1.4% योगदान है।
राष्ट्रीय वन नीति, 1988: पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण-जनजातीय जरूरतों पर ध्यान।वन अधिकार अधिनियम, 2006: वनवासियों के अधिकार मजबूत।ग्रीन इंडिया मिशन, मिष्टी योजना: वन संरक्षण और रोजगार बढ़ाने के प्रयास।संयुक्त वन प्रबंधन समितियां (JFMC): सामुदायिक भागीदारी मजबूत।
सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा
“उत्तराखंड जैसे राज्यों में वन संपदा को आजीविका और स्वरोजगार से जोड़ना जरूरी है। वन संपदा आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की मजबूत नींव बन सकती है।”

