
हरिद्वार:(चीफ एडिटर)बीएचईएल हरिद्वार के वेल्डिंग टेक्नोलॉजी विभाग ने शुक्रवार को “परमाणु और रक्षा क्षेत्र के लिए वेल्डिंग प्रौद्योगिकी में विकास” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला मानव संसाधन विकास केंद्र (एचआरडीसी) में इंडियन वेल्डिंग सोसाइटी (IWS) – नॉर्थ ज़ोन के सहयोग से आयोजित की गई।


कार्यशाला का उद्घाटन बीएचईएल हरिद्वार के महाप्रबंधक एवं प्रमुख रंजन कुमार ने दीप प्रज्वलन कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वेल्डिंग क्षेत्र में भविष्य की चुनौतियों को समझते हुए आधुनिक तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने में नई वेल्डिंग तकनीकों की भूमिका को भी रेखांकित किया।

इस तकनीकी संगोष्ठी में देशभर से वेल्डिंग क्षेत्र के लगभग 60 विशेषज्ञ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए, जिनमें भारत में परमाणु ऊर्जा का उभरता परिदृश्य, एनपीसीएल की 700 मेगावाट स्टीम टरबाइन परियोजना से जुड़ी वेल्डिंग चुनौतियां, ब्रॉन्ज कास्टिंग व एलॉय धातुओं की वेल्डेबिलिटी, तथा उच्च तापमान पर स्टीम कास्टिंग की एक्सोथर्मिक कटिंग तकनीक शामिल रही।
इस अवसर पर बीएचईएल के वरिष्ठ अधिकारीगण – महाप्रबंधक (एफबीएम एंड डब्ल्यूटी) ए.के. शर्मा, अपर महाप्रबंधक (वेल्डिंग टेक्नोलॉजी) बी.एस. अरोड़ा, अपर महाप्रबंधक (एफबीएम) कुलदीप कौशिक, जनरल इंडिया एनर्जी फोरम के सचिव एस.एम. महाजन, फैब्रिकेशन विभाग और एचआरडीसी के अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
कार्यशाला का उद्देश्य वेल्डिंग क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों को साझा कर परमाणु और रक्षा परियोजनाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाना रहा।

