पिरान कलियर:(रागिब नसीम)आपको बता दे कि पहली बार रोजा रखा 6 साल के अरहम पुत्र शहजाद अहमद निवासी मेहवड कला ने मुसलमानों का पवित्र पर्व रमजान-उल-मुबारक का मंगलवार को अपना पहला रोजा रखा.इस पवित्र माह में रोजा रखने से इसका कई गुणा स्वाब मिलता है. बड़े बुजुर्ग और महिलाओं के साथ-साथ मासूम बच्चों में रोजा रखने का उत्साह देखते ही बन रहा है.मासूम बच्चे भी अपने रब को खुश करना चाह रहे हैं. मेहवड कला निवासी अरहम 6 वर्ष की उम्र में अपना पहला रोजा रखकर अल्लाह की बारगाह में अपनी हाजिरी लगाई. अरहम के रोजा रखने परिजनों में खुशी का माहौल.
अरहम ने बताया कि राेजा रखने से उसे काफी सुकून मिला.और वो अल्लाह पाक से दुआ मांगते है कि सभी को रोजा और नमाज पढ़ने की तौफीक दे.उन्होंने कहा कि मै रोज़ा रख कर उन मुसलमानो को ये बताना चाहता हूं.जो लोग रोज़ा नही रखते हैं कि जब मैं सिर्फ 6 वर्ष का होकर रख सकता हूँ. तो आप भी रख सकते हैं और अल्लाह को राज़ी कर सकते हैं. रोज़ा हर मुसलमान पर फर्ज़ हैं।

रमजान माह को इस्लाम में बेहद पवित्र माना जाता है.और इस माह में रोजा रखने की विशेष अहमियत है,यह माह न केवल बड़ों के लिए, बल्कि बच्चों के लिए भी एक महत्वपूर्ण समय होता है.जिसमें वे इबादत और धर्मिक कर्तव्यों को समझने की कोशिश करते हैं.इस दौरान मस्जिदों में बच्चों की भी भीड़ होती है. जो नमाज अदा करने के लिए आते हैं. और बच्चों में रमजान को लेकर विशेष उत्साह देखा जाता है।

