पिरान कलियर:(जीशान मलिक)विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत अलाउद्दीन साबिर कलियर में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से ज़ियारत के लिए पहुंचते हैं, लेकिन आस्था की इस नगरी में मूलभूत सुविधाओं की बदहाल तस्वीर प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। बारिश के बाद अब्दाल शाह गेट, मुख्य पार्किंग मार्ग और लंगर खाना तक जाने वाली सड़कें कीचड़, जलभराव और गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे रोज़ाना श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
फोटो में देख कर अंदाजा लगा सकता है कि कई स्थानों पर सड़क की परत पूरी तरह उखड़ चुकी है। बारिश का पानी गड्ढों में भर जाने से उनका अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे दोपहिया वाहन चालक फिसल रहे हैं और पैदल चलने वाले श्रद्धालु भी चोटिल होने का जोखिम उठा रहे हैं।
जमीनी हकीकत
अब्दाल शाह गेट मार्ग: दरगाह के ये भी एक प्रमुख प्रवेश मार्गों में शामिल इस सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे और जलभराव ने आवाजाही को मुश्किल बना दिया है। श्रद्धालुओं को संभलकर चलना पड़ रहा है।
पार्किंग से दरगाह तक का रास्ता:
मुख्य पार्किंग से दरगाह जाने वाला मार्ग कीचड़ और पानी से लबालब है। बुजुर्ग, महिलाएं, दिव्यांग और छोटे बच्चों के साथ आने वाले परिवारों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
लंगर खाना मार्ग:
हजारों श्रद्धालुओं के भोजन की व्यवस्था वाले लंगर तक जाने वाली गली भी बदहाल है। फिसलन और कीचड़ के कारण कई लोग गिरते-गिरते बच रहे हैं।
श्रद्धालुओं और व्यापारियों में नाराज़गी
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि खराब सड़कें न केवल श्रद्धालुओं को परेशान कर रही हैं, बल्कि व्यापार पर भी सीधा असर पड़ रहा है। वहीं बाहर से आने वाले जायरीन का कहना है कि विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल होने के बावजूद यहां मूलभूत सुविधाओं की यह स्थिति निराशाजनक है।
उर्स से पहले बड़ा सवाल
कुछ ही समय बाद उर्स के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में यदि सड़कें, जल निकासी और सफाई व्यवस्था समय रहते दुरुस्त नहीं हुई तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
लोगों की प्रमुख मांगें
अब्दाल शाह गेट से लंगर खाना तक सड़क का तत्काल पुनर्निर्माण।जलभराव रोकने के लिए प्रभावी नाली व्यवस्था।नियमित सफाई अभियान और कचरा निस्तारण।मुख्य मार्गों पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा व्यवस्था।उर्स से पूर्व सभी आवश्यक विकास कार्यों को प्राथमिकता।स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक नगरी की पहचान केवल आस्था से नहीं, बल्कि व्यवस्थाओं से भी होती है। करोड़ों रुपये के विकास दावों के बीच यदि श्रद्धालुओं को कीचड़ और गड्ढों से होकर गुजरना पड़े, तो यह संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।अब निगाहें इस बात पर हैं कि जिला प्रशासन, नगर पंचायत पिरान कलियर और संबंधित जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेकर सड़कों की मरम्मत कब शुरू कराते हैं।

