
देहरादून:(जीशान मलिक) मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर न्याय, सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए। यह व्यवस्था इतनी संवेदनशील और जवाबदेह होनी चाहिए कि पीड़ित को न्याय के लिए भटकना न पड़े।मंगलवार को सचिवालय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।


मुख्यमंत्री ने 2024 से अब तक लंबित विवेचनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि लंबित रहने के कारणों की जांच कर प्राथमिकता पर निस्तारण किया जाए। विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा हो और पुलिस-अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय से पुराने मामलों का शीघ्र निपटारा हो। प्रभावी पैरवी के लिए विशेष लोक अभियोजकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।सीएम धामी ने कहा कि पीड़ितों को अनुमन्य राहत राशि में किसी भी तरह की देरी न हो। जिन मामलों में विलंब हुआ है, उनकी अलग से समीक्षा की जाए। मदद सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित न रहे, बल्कि प्रभावित परिवारों को चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास और सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाए। गंभीर मामलों में पीड़ित परिवार की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहे। बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए छात्रवृत्ति और शैक्षिक सहायता दी जाए।

मुख्यमंत्री ने मामलों की विवेचना, कोर्ट की स्थिति और राहत राशि की निगरानी के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने को कहा। पुलिस अधिकारियों को अधिनियम के प्रावधानों और पीड़ितों से व्यवहार को लेकर नियमित प्रशिक्षण दिया जाए। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में कानून और अधिकारों को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाए। इस आयोजित बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024 में 189, 2025 में 157 और 2026 में 15 सितंबर तक 116 अभियोग पंजीकृत हुए हैं, जिनमें 25 विवेचनाधीन हैं। 2024-25 में 205 पीड़ितों को 228.71 लाख, 2025-26 में 127 पीड़ितों को 143.16 लाख और 2026-27 में 18 सितंबर तक 104 पीड़ितों को 99.52 लाख रुपये की सहायता दी गई।
बैठक में समाज कल्याण मंत्री खजान दास, विधायक ममता राकेश, सचिव गृह शैलेश बगौली, सचिव समाज कल्याण श्रीधर बाबू अद्दांकी सहित पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

