देहरादून:(चीफ एडिटर)प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा पेट्रोल और डीजल बचाने की अपील के बावजूद उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और पहाड़ों की रानी मसूरी में पर्यटकों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। सप्ताहांत पर शहर और हिल स्टेशन की ओर वाहनों का दबाव इतना अधिक रहा कि ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित होती नजर आई।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, 12 मई को रात 12 बजे तक करीब 14,218 वाहन देहरादून में प्रवेश कर चुके थे। वहीं इससे पहले शुक्रवार रात 8 बजे तक 12,019 वाहन आशारोड़ी चेक पोस्ट से गुजर चुके थे। आशारोड़ी देहरादून का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है, जहां से हर दिन हजारों वाहन शहर में दाखिल होते हैं।पर्यटकों की बढ़ती संख्या और वाहनों की भारी आवाजाही ऐसे समय में देखने को मिल रही है, जब राज्य सरकार ईंधन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर नई पहल शुरू कर चुकी है।
“उत्तराखंड सरकार ने शुरू किया ‘नो व्हीकल डे’”
Pushkar Singh Dhami सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि अब हर शनिवार को राज्य में आधिकारिक रूप से ‘नो व्हीकल डे’ मनाया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य लोगों को सार्वजनिक परिवहन, साइकिल और अन्य वैकल्पिक साधनों के उपयोग के लिए प्रेरित करना है।
सरकारी मंत्रियों और अधिकारियों को भी इस अभियान का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने विभागीय कर्मचारियों से शनिवार के दिन सार्वजनिक परिवहन या पर्यावरण अनुकूल साधनों का उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति छोटी-छोटी कोशिश करे तो ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
“रूस-यूक्रेन युद्ध के असर के बीच सरकार की तैयारी”
राज्य सरकार का यह कदम वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बढ़ती चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री धामी की अध्यक्षता में इस योजना पर सहमति बनी थी।
सरकार अब केवल अल्पकालिक नहीं बल्कि दीर्घकालिक सुधारों पर भी काम कर रही है। इसमें वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन का विस्तार और सरकारी वाहनों की संख्या कम करने जैसे कदम शामिल हैं।
“इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति पर भी जोर”
उत्तराखंड सरकार जल्द ही नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) नीति लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित नीति के तहत सरकार द्वारा खरीदे जाने वाले नए वाहनों में 50 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहन अनिवार्य किए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि इससे न केवल पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम होगी, बल्कि राज्य में प्रदूषण नियंत्रण और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि, वर्तमान हालात यह संकेत दे रहे हैं कि पर्यटन सीजन के दौरान निजी वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है और लोगों में अभी भी ‘नो व्हीकल डे’ अभियान को लेकर अपेक्षित जागरूकता देखने को नहीं मिल रही है।

