हरिद्वार तहसील में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश: दाखिल-खारिज के खेल में पकड़ा गया ‘ निजी सहायक’, असली मास्टरमाइंड कौन?
हरिद्वार की शांत गलियों में इन दिनों एक सवाल गूंज रहा है — “क्या सिर्फ अनुज ही दोषी है या पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है?”

तहसील परिसर, जहां लोगों को न्याय और सरकारी सेवा मिलनी चाहिए, वहां एक ऐसा खेल सामने आया है जिसने पूरी व्यवस्था की नींव को हिला दिया है। महिला पटवारी मोनिका के निजी सहायक अनुज को विजिलेंस टीम ने रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए पकड़ा — 4500 रुपये दाखिल-खारिज के नाम पर।

पर कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अनुज कोई सरकारी मुलाजिम नहीं था। वह तो मोनिका का “निजी सहायक” था — एक ऐसा व्यक्ति जिसे न कोई सरकारी पहचान है, न जिम्मेदारी। फिर भी, वह तहसील में बैठकर जनता से पैसे वसूलता था। कैसे?

सूत्र बताते हैं कि हर तहसील में ऐसे कई “अनौपचारिक सहायकों” का जाल बिछा हुआ है। ये लोग सिर्फ पैसे लेते नहीं, बल्कि एक पूरी भ्रष्ट कड़ी का हिस्सा होते हैं — पटवारी, कानूनगो, तक इस ‘सुविधा शुल्क’ नामक रिश्वत सिस्टम को चलाते हैं।

आम जनता अब यही पूछ रही है — क्या अनुज अकेला गुनहगार है? या उसके पीछे कोई और चेहरा है जो अब भी परदे के पीछे छुपा बैठा है?

प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। लेकिन अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या मोनिका की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होगी? या फिर यह मामला भी पुराने फाइलों की धूल में दबा दिया जाएगा?
तहसील में एक गूंगी खामोशी है… पर जनता का सब्र अब जवाब देने लगा है। अगला मोहरा कौन होगा — ये वक्त बताएगा।

