
हरिद्वार:(चीफ एडिटर) डाक पहुंचाने में लापरवाही बरतने पर डाक विभाग को स्थायी लोक अदालत, हरिद्वार ने कड़ा झटका दिया है। अदालत ने विभाग की सेवा में कमी मानते हुए वरिष्ठ नागरिक के पक्ष में 20 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और वाद व्यय देने का आदेश दिया है।मामला वाद संख्या 37/2025, महेश चन्द्र शर्मा बनाम डाक सहायक (डाकघर प्रभारी), ज्वालापुर से जुड़ा है। आवेदक महेश चन्द्र शर्मा (उम्र 67 वर्ष), निवासी न्यू हरिद्वार कॉलोनी, प्रेमनगर आश्रम, ज्वालापुर ने अदालत में वाद दायर किया था।


आवेदक के अनुसार, सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत उनकी प्रथम विभागीय अपील की सुनवाई 18 मार्च 2025 को उपजिलाधिकारी रोशनाबाद की अदालत में तय थी। इसके लिए डाक विभाग ने 6 मार्च 2025 को उन्हें पंजीकृत डाक भेजी। ऑनलाइन ट्रैकिंग में डाक 21 मार्च 2025 को वितरित दिख रही थी, लेकिन वास्तव में उन्हें डाक 3 अप्रैल 2025 को मिली। देरी से डाक मिलने के कारण वह सुनवाई में उपस्थित नहीं हो सके और उनकी अपील खारिज हो गई।डाक विभाग ने अपने जवाब में माना कि संबंधित डाक 7 मार्च 2025 को वितरण के लिए आई थी। आउटसोर्स डाकिया 7 से 20 मार्च तक छुट्टी पर था और कंप्यूटर की गलती से डाक को गलत तरीके से वितरित दिखा दिया गया। असल में वितरण 3 अप्रैल को हुआ।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद स्थायी लोक अदालत ने माना कि डाक विभाग की सेवा में लापरवाही सिद्ध हुई है। अदालत ने कहा कि लोक उपयोगिता सेवाओं से जुड़े विभागों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि जनता का उन पर बड़ा भरोसा होता है। सिर्फ कर्मचारी पर कार्रवाई कर देने से विभाग अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।सभी तथ्यों और आवेदक के वरिष्ठ नागरिक होने को देखते हुए अदालत ने डाक विभाग को 10 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और 10 हजार रुपये वाद व्यय सहित कुल 20 हजार रुपये 45 दिन के भीतर अदा करने का आदेश दिया है। साथ ही विभाग को दोषी कर्मचारी से यह राशि वसूलने की छूट भी दी है।

