हरिद्वार:(मनन ढींगरा)शिवालिक नगर (Q-253) निवासी तथा राष्ट्रीय बैडमिंटन कोच दिवंगत गीता पंत ने जीवनकाल में लिया गया नेत्रदान एवं देहदान का संकल्प मृत्यु उपरांत पूरा करवाकर समाज के लिए अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
उनके परिजन पुष्पा पंत एवं देवेंद्र पंत ने इस संकल्प को समय पर पूरा कर मानवता, सेवा और संवेदना का अत्यंत प्रभावी संदेश दिया।
मिली जानकारी के अनुसार 25 नवम्बर 2025 को गीता पंत के निधन के तुरंत बाद परिवार ने दधीचि देहदान समिति के सदस्य सुभाष चाँदना से संपर्क किया। समिति द्वारा तत्काल एम्स, ऋषिकेश को सूचित किया गया। सूचना मिलते ही एम्स की टीम—डॉ. दिव्या कृष्णा एवं पंकज नेगी—ने उनके निवास स्थान पर पहुँचकर नेत्रदान (कॉर्निया प्राप्ति) की प्रक्रिया सफलतापूर्वक सम्पन्न की।
अगले दिन 26 नवम्बर की प्रातः ही समिति द्वारा एंबुलेंस की व्यवस्था कर देहदान की प्रक्रिया एम्स, ऋषिकेश में पूर्ण कराई गई। इस दौरान परिवार सहित समिति के सदस्य सुभाष चाँदना, प्रवीण कुमार एवं अशोक मेहता उपस्थित रहे और निरंतर सहयोग प्रदान करते रहे।
“खेल जगत में उत्कृष्ट योगदान…
रोंगटे खड़े कर देने वाला भावनात्मक पल तब और गहरा हो गया जब खिलाड़ियों व खेलजगत से जुड़े लोगों ने गीता पंत के जीवन को याद किया।
राष्ट्रीय स्तर की बैडमिंटन खिलाड़ी,NIS पटियाला स्नातक,भोपाल व छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय कोच,अनेक खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने वाली प्रशिक्षक,रायपुर स्टेडियम इंचार्ज,तथा ‘खेलो इंडिया’ मिशन में सक्रिय रूप से जुड़े रहीं। उन्होंने चीन, मलेशिया, श्रीलंका एवं थाईलैंड जैसे देशों में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
“समिति ने व्यक्त की श्रद्धांजलि…
दधीचि देहदान समिति (रजि.), हरिद्वार ने पंत परिवार के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि “गीता पंत का जीवन खेल, अनुशासन और सेवा की मिसाल रहा। मृत्यु उपरांत भी उनका देहदान व नेत्रदान अनेक जीवनों को प्रकाश और नई दिशा प्रदान करेगा। पंत परिवार का यह कदम समाज में सकारात्मक संदेश प्रसारित करेगा।”

