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7 Jun 2026, Sun

मैदान-ए-अराफात बना इबादत का समंदर: “लब्बैक” की सदाओं के बीच लाखों हाजियों ने मांगी रहमत, गुनाहों से तौबा

दिल्ली/सऊदी अरब:(जीशान मलिक)मक्का हज-ए-बैतुल्लाह का सबसे अज़ीम रुक्न ‘वुकूफ-ए-अराफात’ मंगलवार को अकीदत और रूहानियत के साथ अदा किया गया। दुनिया के कोने-कोने से आए 20 लाख से ज्यादा हाजी जब सफेद एहराम में मैदान-ए-अराफात में जमा हुए तो पूरा मंजर इंसानियत की यकजहती की मिसाल बन गया। सूरज निकलने से लेकर गुरूब होने तक मैदान “लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक, लब्बैक ला शरीका लका लब्बैक” की पुरसोज़ सदाओं से गूंजता रहा।

“आंसुओं से भीगे चेहरे, लबों पर दुआ”

जौहर और असर की नमाज एक साथ अदा करने के बाद हाजियों ने हाथ उठाकर अल्लाह की हम्द बयान की। किसी ने अपने गुनाहों की माफी मांगी, किसी ने वालिदैन के लिए जन्नत की दुआ की, तो किसी ने फिलिस्तीन, यमन समेत पूरी उम्मत-ए-मुस्लिमा के अमन-ओ-सुकून के लिए गिड़गिड़ाकर दुआएं कीं। गर्मी और थकान के बावजूद बुजुर्ग, औरतें, बच्चे, नौजवान सब सजदों में पड़े रहे। आंखों में नदामत के आंसू और लबों पर सिर्फ रब का जिक्र था।

“जबल-ए-रहमत के साए में कुबूलियत की उम्मीद”

मैदान-ए-अराफात के बीचों-बीच स्थित ‘जबल-ए-रहमत’ यानी रहमत की पहाड़ी के आसपास सबसे ज्यादा भीड़ रही। मान्यता है कि यहीं हज़रत आदम अलैहिस्सलाम और हज़रत हव्वा की मुलाकात हुई थी और यहीं पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने 10 हिजरी में हज्जतुल विदा का आखिरी खुत्बा दिया था। इसी अहमियत के चलते हाजियों का यकीन है कि अराफात के दिन मांगी गई दुआ रद्द नहीं होती। इस दिन को ‘यौम-ए-अराफा’ यानी मगफिरत और जहन्नुम से आज़ादी का दिन कहा जाता है।

“मस्जिद-ए-नमिरा से खुत्बा, पूरी दुनिया में लाइव”

मस्जिद-ए-नमिरा से शेख डॉ. यूसुफ बिन मुहम्मद बिन सईद ने हज का खुत्बा दिया, जिसे 50 से ज्यादा भाषाओं में लाइव प्रसारित किया गया। खुत्बे में सब्र, भाईचारे, इंसाफ और जुल्म के खिलाफ खड़े होने का पैगाम दिया गया। सऊदी हुकूमत ने हाजियों की सहूलियत के लिए जगह-जगह पानी, मिस्ट फैन, मेडिकल कैंप और छायादार टेंट का इंतजाम किया था। ड्रोन और हेलिकॉप्टर से भी निगरानी की गई।

“सूरज ढलते ही ‘नफरा’ का आगाज, मुजदलिफा को कूच”

असर के बाद सूरज गुरूब होते ही ‘नफरा’ यानी अराफात से रवानगी शुरू हो गई। लाखों हाजी लब्बैक पढ़ते हुए मुजदलिफा के लिए पैदल, बसों और ट्रेन से रवाना हुए। मुजदलिफा में खुले आसमान के नीचे रात गुजारकर हाजी मगरिब और ईशा की नमाज एक साथ अदा करेंगे और शैतान को मारने के लिए जमरात की कंकरियां चुनेंगे। बुधवार को यौम-ए-नहर यानी कुर्बानी का दिन होगा और हाजी बड़ी जमरात पर कंकरी मारकर हज के अगले अरकान पूरे करेंगे।

“सऊदी हुकूमत के इंतजाम”

सऊदी हज मंत्रालय के मुताबिक इस साल 20 लाख से ज्यादा हाजी अराफात पहुंचे। 32 हजार से ज्यादा वॉलंटियर, 25 अस्पताल और 150 से ज्यादा हेल्थ सेंटर हाजियों की खिदमत में लगे हैं। गर्मी से बचाव के लिए 10 लाख घन मीटर पानी का छिड़काव किया गया।

“भारत से गए 1.75 लाख हाजी”

केंद्रीय हज कमेटी के अनुसार भारत से इस साल करीब 1.75 लाख आज़मीन-ए-हज अराफात पहुंचे। भारतीय हज मिशन ने सभी राज्यों के हाजियों के लिए अलग कैंप, मेडिकल और भाषा वॉलंटियर की व्यवस्था की गई है।

By zeeshan

Zeeshan डिजिटल मीडिया से जुड़े युवा पत्रकार हैं। वे Bhagwasanatantimes.com के साथ कार्यरत हैं और राजनीति, समाज, धर्म और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। डिजिटल पत्रकारिता में उनकी गहरी रुचि है, और वे निष्पक्ष और तथ्यात्मक खबरों के लिए जाने जाते हैं।

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