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22 Apr 2026, Wed

पिरान कलियर में वक्फ बोर्ड अध्यक्ष के खिलाफ बगावत की आग

सिर पर उठता गुस्से का सैलाब: पिरान कलियर में वक्फ बोर्ड अध्यक्ष के खिलाफ बगावत की आग

पीपल चौक बना विरोध का केंद्र, शादाब शम्स के बयान ने भड़काई चिंगारी

पिरान कलियर,जिशान मालिक

उत्तराखंड – शुक्रवार की दोपहर, जैसे ही जुमे की नमाज़ खत्म हुई, पिरान कलियर की सड़कों पर एक अलग ही सन्नाटा छा गया—वो सन्नाटा जो किसी बड़े तूफान से पहले आता है। पीपल चौक पर जुटी भीड़ का चेहरा गुस्से से तमतमाया हुआ था और हवा में गूंजते नारे इस बात की गवाही दे रहे थे कि कुछ गंभीर होने वाला है।

और फिर…

आग की लपटों में घिरा एक पुतला—वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स का प्रतीक—विरोध की ऊंची लहरों के बीच जल उठा। नारों की गूंज और चेहरों पर भड़की भावनाएं इस बात का संकेत थीं कि मामला अब सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रह गया।

 

क्या कहा था शादाब शम्स ने?

शम्स ने दावा किया था, “जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नहीं, वो मुसलमान नहीं।” और यहीं से शुरू हुई एक आग, जिसने पूरे पिरान कलियर को अपनी लपटों में ले लिया। उन्होंने वक्फ बिल का विरोध करने वालों को ‘गुमराह’ बताया, लेकिन शायद उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि उनका यह बयान मुस्लिम समाज की जड़ों तक को हिला देगा।

भीड़ का गुस्सा… और चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने थानाध्यक्ष के माध्यम से रुड़की के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें साफ तौर पर चेताया गया—अगर शम्स ने माफी नहीं मांगी, तो आंदोलन अब सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं रहेगा, कानूनी और सामाजिक मोर्चों पर भी जवाब दिया जाएगा।

भीड़ में कौन-कौन था?

नामों की एक लंबी फेहरिस्त—मोइन साबरी, राशिद रहीस, जावेद साबरी, भूरा गोल्डन, तस्लीम एडवोकेट, गुलजार चौधरी, और दर्जनों अन्य… हर चेहरा एक सवाल लिए खड़ा था—“कौन तय करेगा हमारी पहचान?”

अब आगे क्या?

शादाब शम्स के शब्दों ने एक लकीर खींच दी है—जिसे मिटाना अब इतना आसान नहीं। सवाल ये है कि क्या वो इस गुस्से की आग को बुझा पाएंगे, या यह विरोध एक और बड़े बवंडर की आहट बनकर सामने आएगा?

इस कहानी का अगला पन्ना… अब वक्त लिखेगा।

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