पिरान कलियर:(जीशान मलिक)मानसून की पहली मूसलाधार बारिश ने ही दरगाह प्रशासन और नगर पंचायत की तमाम तैयारियों की कलई खोल कर रख दी। देर रात से हो रही तेज बारिश के बाद बाजारों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई और बरसात के साथ बहकर आने वाला गंदा पानी सीधे दरगाह साबिर पाक के पवित्र परिसर में जा पहुंचा।पवित्र आंगन में गंदगी और बदबूदार पानी भरते ही देश-विदेश से आए अकीदतमंदों की आस्था को ठेस पहुंची। लोगों में भारी आक्रोश है। हर कोई दरगाह प्रशासन और नगर पंचायत की लापरवाही कोस रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल मानसून से पहले प्रेस नोट जारी कर नालों की सफाई, जलनिकासी दुरुस्त करने और अतिक्रमण हटाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि जमीनी स्तर पर कुछ नहीं होता। मुख्य नाले कूड़े और गंदगी से पटे पड़े हैं। कई जगह नालों पर अवैध कब्जे हैं। समय पर सफाई न होने और निकासी मार्ग बंद होने के कारण बारिश का पानी बाजारों, अस्थायी दुकानों को डुबोते हुए सीधा दरगाह परिसर में घुस गया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अकीदतमंदों ने खुद बाल्टियों और बोरियों से पानी रोकने की कोशिश की, लेकिन बिना समुचित ड्रेनेज व्यवस्था के उनकी मेहनत बेकार गई। लोगों का आरोप है कि अगर बरसात से पहले नालों की सफाई और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई गंभीरता से की गई होती तो आज दरगाह की बेअदबी नहीं होती।सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर पंचायत और दरगाह प्रशासन के पास सफाई कर्मचारियों, सुपरवाइजर और बजट की कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद न नियमित सफाई हुई और न ही जलभराव से बचाव के लिए कोई ठोस कार्ययोजना बनी। नतीजा यह कि हर साल की तरह इस बार भी पहली ही बारिश में पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गई।
इस लापरवाही पर साहिबजादा शाह यावर एजाज अली साबरी, मुनव्वर अली साबरी, शफीक साबरी, खालिद साबरी, अजीम सिद्दीकी, असद मियां, परवेज मलिक और इस्तिकार अली सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने कड़ा रोष व्यक्त किया। सभी ने एक स्वर में मांग की कि अब केवल आश्वासन नहीं चाहिए। दरगाह परिसर के लिए स्थायी जलनिकासी योजना बने, नालों से अतिक्रमण हटे और हर महीने सफाई की जिम्मेदारी तय हो।अकीदतमंदों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को मजबूर होना पड़ेगा।

