
राजस्थान:(जीशान मलिक) राजस्थान में स्थित अजमेर शरीफ में दरगाह ख्वाजा गरीब नवाज के उर्स का आगाज पिछले महीने से ही हो गया था। ख्वाजा गरीब नवाज के चाहने वालों की भीड़ दरगाह शरीफ में हमेशा देखने को मिलती हैं।अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्ला अलेह की 814वें उर्स के मौके पर खास रौनक देखी जा रही है। दुनिया के कोने-कोने से अकीदमंद दरगाह पर हाजिरी लगाने के लिए पहुंच रहे हैं। इस मौके पर अकीदतमंदों के लिए मजार पर लंगर का खास ऐहतमान किया गया है।इस लंगर को चखने के लिए जायरीनों में होड़ लगी है।
चिश्तिया सिलसिले की पुरानी रिवायत के मुताबिक, सैकड़ों सालों से सूफी खानकाहों पर आज भी खास और आम अकीदतमंदों के लिए लंगर का एहतमाम किया जाता है। पैगम्बरे इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से शुरू हुई यह लंगर की रिवायत आज भी आले रसूल के दरबारों में नजर आती है।अजमेर शरीफ दरगाह में करीब आठ सौ सालों से लगातार लंगर का एहतमाम जारी है।
मिली जानकारी के अनुसार बताया जाता है कि बड़ी डेग़ मुगल बादशाह अकबर ने दान किया था। जिसमें 120 मन मीठा चावल पकाया जाता है। जबकि छोटी डेग़ बादशाह जहांगीर की ओर से पेश की गई थी जिसमें 60 मन लंगर पकता है.
खास बात यह है कि इन डेगो में खाना पकते समय इनका ऊपरी हिस्सा बिल्कुल ठंडा रहता है बिल्कुल भी गर्म नहीं होता। जिसे बच्चा भी छू सकता है। अकीदतमंद अपनी मुराद पूरी होने पर डेग़ में नजराना और खाने-पीने का सामान भी डालते हैं।


