Rishikesh में फूलों की होली: जब भजन और रंगों ने समा बांध दिया!
ऋषिकेश, 13 मार्च – मनन ढींगरा
ऋषिकेश के मां कात्यायनी ज्ञान करतार आश्रम में इस बार की होली मिलन समारोह कुछ अलग ही अंदाज में मना। फूलों की होली, रंगों की जगह खुशबू की बौछार, और भजनों की गूंज ने माहौल को रहस्यमय और भक्तिमय बना दिया।
लेकिन असली जादू तब शुरू हुआ जब महिला मंडली ने राधा-कृष्ण के भजनों की ऐसी तान छेड़ी कि पूरा आश्रम एक अलग ही ऊर्जा से भर गया। मानो समय थम गया हो, और चारों ओर सिर्फ संगीत की तरंगें तैर रही हों।
जैसे-जैसे सुरों का जादू बढ़ता गया, ज्ञान करतार पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं ने भी अपनी प्रस्तुतियों से समा बांध दिया। उनके नृत्य ने मानो कृष्ण की लीला को जीवंत कर दिया।
मगर, क्या यह सिर्फ एक साधारण होली मिलन था? नहीं! शहर के वरिष्ठ नागरिकों और समाजसेवियों की उपस्थिति ने इसे एक ऐतिहासिक क्षण बना दिया। गुरविंदर सलूजा, नमिता सलूजा, प्रधानाचार्य सरिता पैन्यूली और शिक्षिकाओं की टीम—बबीता, सुधा, सोनम, अर्चना, किरण, ममता, यशोदा, नीलम, अनुराधा, रेखा—सबने इस आयोजन को और भव्य बना दिया।
ऐसा लगा मानो इस शाम को कोई देख रहा था, कोई अदृश्य शक्ति जो इस भव्यता की साक्षी बन रही थी… शायद स्वयं राधा-कृष्ण?
ऋषिकेश की यह फूलों की होली सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि एक अध्यात्मिक अनुभव बन गई, जिसे वहां मौजूद हर व्यक्ति जीवनभर नहीं भूल पाएगा।

