Prayagraj Mahakumbh
Prayagraj Mahakumbh महाकुंभ के दूसरे ‘अमृत स्नान’ के अवसर पर बुधवार तड़के हुई भगदड़ में 30 से अधिक श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 60 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा उस समय हुआ जब लाखों की भीड़ संगम में डुबकी लगाने के लिए घाटों की ओर बढ़ रही थी। अचानक हुई भगदड़ से कई श्रद्धालु गिर पड़े और उन्हें संभलने का मौका नहीं मिला।
कैसे हुआ हादसा?
बुधवार को मौनी अमावस्या, जो कि महाकुंभ मेले के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक मानी जाती है, के दिन भारी संख्या में श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में स्नान करने पहुंचे थे। मेले में पहले से ही प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण के लिए सुरक्षा व्यवस्था की थी, लेकिन अनुमान से अधिक श्रद्धालु उमड़ने के कारण हालात बेकाबू हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात करीब 1 बजे के आसपास जब श्रद्धालु संगम की ओर बढ़ रहे थे, तब अचानक एक अस्थायी पुल पर अफरातफरी मच गई। भीड़ का दबाव इतना बढ़ गया कि लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे। स्नान के लिए बने अस्थायी मार्गों पर श्रद्धालु फंस गए, जिससे भगदड़ और ज्यादा बढ़ गई। कुछ लोग गिर पड़े और पीछे से आ रही भीड़ उन्हें रौंदते हुए आगे बढ़ गई।
मौतों की संख्या बढ़ने की आशंका
डीआईजी कुंभ मेला वैभव कृष्ण ने पुष्टि की है कि अब तक 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 60 से ज्यादा घायल हैं। कई घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
मरने वालों में कई श्रद्धालु उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, असम और गुजरात से आए हुए थे। अधिकारियों का कहना है कि कुछ घायलों को उनके परिजन इलाज के लिए अपने साथ ले गए हैं, इसलिए घायल श्रद्धालुओं की सही संख्या जुटाने में समय लग सकता है।
राहत एवं बचाव कार्य जारी
घटना के तुरंत बाद एनडीआरएफ (NDRF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव कार्य शुरू किया। प्रशासन की टीम ने घायलों को तत्काल प्रयागराज मेडिकल कॉलेज और अन्य नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया। 36 लोग प्रयागराज मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर बनी हुई है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने हादसे के पीड़ितों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 1920 जारी किया है, जहां लोग अपने लापता परिजनों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने उच्च अधिकारियों को तत्काल राहत कार्य शुरू करने और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
योगी आदित्यनाथ ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि भीड़ नियंत्रण के लिए और अधिक पुलिस बल और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाएगी।
महाकुंभ में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, लेकिन फिर भी चूक?
महाकुंभ मेला, जो कि हर 12 साल में एक बार आयोजित होता है, इस बार करोड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। इस महाकुंभ में अनुमानित 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।
हादसे से पहले प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए थे, जिनमें ड्रोन कैमरों से निगरानी, सुरक्षा बैरिकेडिंग, अस्थायी पुलों का निर्माण, और पुलिस बल की तैनाती शामिल थी। इसके बावजूद इतनी बड़ी त्रासदी हो जाना सुरक्षा में गंभीर चूक को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन को भीड़ को चरणबद्ध तरीके से स्नान की अनुमति देनी चाहिए थी और संगम तक पहुंचने के मार्गों को और व्यवस्थित बनाना चाहिए था।
श्रद्धालुओं से अपील: सुरक्षा नियमों का पालन करें
धार्मिक संगठनों और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचें, प्रशासन द्वारा तय किए गए स्नान के समय का पालन करें और सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करें।
इसके अलावा, प्रशासन ने श्रद्धालुओं को भीड़ में धक्का-मुक्की से बचने, धीमे चलने और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी है।
महाकुंभ में पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब महाकुंभ मेले में भगदड़ के कारण जान-माल का नुकसान हुआ है। इससे पहले भी 2013 में इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में 36 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी, जबकि 1954 में प्रयागराज में ही भीषण भगदड़ में 800 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
अगले अमृत स्नान के लिए प्रशासन सतर्क
महाकुंभ मेला अभी 45 दिन तक चलेगा और आने वाले दिनों में बसंत पंचमी (फरवरी) और महाशिवरात्रि (मार्च) को और अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। प्रशासन अब इन दिनों के लिए और सख्त सुरक्षा इंतजाम करने की योजना बना रहा है।


