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7 Jun 2026, Sun

किसान क्रांति की गूंज, बड़े आंदोलन की आहट!

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किसान क्रांति की गूंज, बड़े आंदोलन की आहट!

रुड़की के कृष्ण रेस्टोरेंट में रविवार को हुए संयुक्त किसान क्रांति मोर्चा की तीसरी बैठक में जब दर्जनों संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उनके प्रतिनिधि एकजुट हुए, तो माहौल में एक अलग ही ऊर्जा थी। किसानों और मजदूरों की विभिन्न समस्याओं पर गहन चर्चा हुई, और आने वाले समय में बड़े आंदोलन की पटकथा तैयार कर दी गई।

क्या सरकार के खिलाफ होगी आर-पार की लड़ाई?

भारतीय किसान यूनियन रोड के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक का संचालन एडवोकेट फ़रमान त्यागी, राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन (एकता) ने किया। उन्होंने मंच से ऐलान किया कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो भारतीय किसान यूनियन (एकता) अगले महीने देहरादून विधानसभा का घेराव करेगी। और अगर तब भी सरकार नहीं मानी, तो संयुक्त किसान क्रांति मोर्चा के बैनर तले देशव्यापी आंदोलन होगा।

क्या मांगे बनी आंदोलन की वजह?

बैठक में कई संगठनों के नेताओं ने अपनी बातें रखीं। सचिन तोड़ा, भारतीय किसान यूनियन रोड के प्रदेश अध्यक्ष ने ऐलान किया कि वे इस संघर्ष में तन, मन, धन से पूरी ताकत झोंक देंगे। वहीं, चौधरी शाह आलम, अध्यक्ष भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा, ने उत्तराखंड में लागू हुए UCC कानून का विरोध करते हुए किसानों के साथ खड़े रहने की घोषणा की।

एटा और मैनपुरी से आए ठाकुर हो सकते भगवान ने नोएडा में संयुक्त किसान क्रांति मोर्चा का कार्यालय खोलने की बात कही, ताकि आंदोलन को और ज्यादा संगठित किया जा सके।

ये हैं किसानों की मुख्य मांगे:
• गन्ने का मूल्य ₹700 प्रति क्विंटल किया जाए
• देशभर में शिक्षा और चिकित्सा को मुफ्त किया जाए
• 60 साल के बाद वृद्धावस्था पेंशन ₹5000 प्रतिमाह दी जाए
• उत्तराखंड में लागू UCC कानून को वापस लिया जाए
• पश्चिम उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाया जाए
• बिजली विभाग द्वारा स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाई जाए
• खाद-बीज, कीटनाशक आदि पर 50% सब्सिडी दी जाए

आंदोलन की धमक!

बैठक में मौजूद भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा, भारतीय किसान यूनियन (एकता), भारतीय किसान यूनियन रोड, जय जवान जय किसान लोक शक्ति संगठन, भारतीय किसान यूनियन स्वतंत्र, किसान मजदूर एकता सहायता समिति जैसे संगठनों ने आगामी बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया।

अब सवाल ये है कि क्या सरकार इन मांगों को मानेगी या किसान क्रांति की ज्वाला और भड़क उठेगी? अगले कुछ हफ्ते देश की राजनीति के लिए अहम साबित हो सकते हैं!

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