हरिद्वार:(चीफ एडिटर)नगर निगम हरिद्वार ने आज से शहर में बढ़ते बंदर आतंक पर नियंत्रण के लिए विशेष अभियान की शुरुआत की है। पिछले कई महीनों से स्थानीय नागरिकों और वार्ड पार्षदों की ओर से बंदरों के बढ़ते उत्पात को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। बंदरों के झुंड न केवल घरों की छतों पर उत्पात मचा रहे थे, बल्कि बच्चों और बुजुर्गों पर भी हमले की घटनाएँ सामने आ रही थीं।
हाल ही में हुई नगर निगम बोर्ड बैठक में इस विषय पर गंभीरता से चर्चा की गई, जिसके बाद निगम प्रशासन ने एक आउटसोर्स एजेंसी को बंदर पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी।
अभियान के पहले ही दिन, सोमवार 28 अक्टूबर को, निगम द्वारा नियुक्त टीम ने कंनखल क्षेत्र में अभियान चलाते हुए 12 बंदरों को सफलतापूर्वक पकड़ा, जिन्हें वन विभाग की देखरेख में सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ा जाएगा।
निगम प्रशासन ने बताया कि आने वाले दिनों में यह अभियान शहर के अन्य प्रभावित वार्डों—जैसे ज्वालापुर, भीमगोडा, भेल और मायापुर—में भी चलाया जाएगा, ताकि आम जनता को बंदरों के उत्पात से राहत मिल सके।
नगर निगम की महापौर किरण जैसल ने कहा —
“हमारा उद्देश्य शहरवासियों को सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना है। बंदरों की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी, जिसे खत्म करने के लिए निगम ने यह ठोस कदम उठाया है। यह अभियान लगातार जारी रहेगा।”
वहीं उपनगर आयुक्त दीपक गोस्वामी ने जानकारी दी —
“बंदर पकड़ने की पूरी प्रक्रिया मानवीय तरीके से और नियमानुसार की जा रही है। किसी भी बंदर को नुकसान नहीं पहुँचाया जा रहा। सभी पकड़े गए बंदरों को वन विभाग के सहयोग से प्राकृतिक आवास यानी जंगल में छोड़ा जा रहा है।”
नगर निगम ने साथ ही नागरिकों से अपील की है कि वे बंदरों को खाने-पीने की वस्तुएँ न दें, ताकि यह समस्या दोबारा न बढ़े। निगम का लक्ष्य अगले एक माह में शहर के प्रमुख क्षेत्रों से बंदरों के आतंक को पूरी तरह समाप्त करना है।

