भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सपरिवार परमार्थ निकेतन पहुंचे, स्वामी चिदानन्द सरस्वती से की भावपूर्ण मुलाकात
ऋषिकेश, 27 मई 2025 , मनन ढींगरा,भगवा सनातन टाइम्स
परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में आज का दिन भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और राष्ट्रीय मूल्यों की अनुपम छाया में ऐतिहासिक बन गया जब भारत के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपनी धर्मपत्नी सविता कोविंद और पुत्री स्वाति कोविंद के साथ आश्रम पधारे।
उनके स्वागत में परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने वेदमंत्रोच्चारण, शंखध्वनि और पुष्पवर्षा के साथ भव्य स्वागत किया। पूरे परिसर में एक आध्यात्मिक ऊर्जा की लहर दौड़ पड़ी।
स्वागत के बाद रामनाथ कोविंद और स्वामी चिदानन्द सरस्वती के बीच गहन और भावनात्मक चर्चा हुई। इस दौरान दोनों महान व्यक्तित्वों ने महात्मा गांधी के आदर्शों, भारतीय संस्कृति, और सनातन जीवन मूल्यों पर विचार साझा किए।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कोविंद जी को एक प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा, “उनकी जीवन यात्रा भारतीय लोकतंत्र और समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरक है। एक साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक पहुँचना, यह उनकी सादगी, निष्ठा और मूल्यों का प्रतिफल है।”
उन्होंने कहा, “भारतीयता केवल एक भूगोल नहीं, बल्कि एक भाव है — जिसमें विविधता में एकता, सेवा में साधना और जीवन में समर्पण की भावना है। समरसता केवल समानता नहीं, बल्कि सम्मानपूर्ण सह-अस्तित्व है, जो गांधी जी के रामराज्य की संकल्पना का मूल है।”
इस अवसर पर रामनाथ कोविंद ने भी गहराई से विचार साझा किए। उन्होंने कहा, “गांधीजी का रामराज्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि एक ऐसी सामाजिक संरचना है जहाँ सबको सम्मान, न्याय और अधिकार मिले। आज भी यह विचार उतना ही प्रासंगिक है।”
उन्होंने स्वामी चिदानन्द सरस्वती द्वारा संचालित गंगा एक्शन परिवार, ग्लोबल इंटरफेथ वॉश एलायंस, और स्वच्छता व जल संरक्षण अभियानों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और कहा, “पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है, और परमार्थ निकेतन इस दिशा में वैश्विक प्रेरणा बन चुका है।”
कोविंद ने कहा कि परमार्थ निकेतन जैसे स्थल आंतरिक शांति, भारतीयता और सेवा भावना का जीवंत उदाहरण हैं। “यहाँ की दिव्य गंगा आरती, साधना और सेवा, भारत की आत्मा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करती हैं।”
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने राष्ट्रपति कोविंद को रूद्राक्ष का पौधा भेंट कर गंगा तट पर अभिनंदन किया। यह मुलाकात भारतीय अध्यात्म और राष्ट्रीय चेतना का एक प्रेरणादायक संगम बन गई।

