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8 Jun 2026, Mon

हरिद्वार में डिजिटल क्रांति: 318 ग्राम पंचायतों के परिवार रजिस्टर हुए ऑनलाइन!

हरिद्वार में डिजिटल क्रांति: 318 ग्राम पंचायतों के परिवार रजिस्टर हुए ऑनलाइन!

ग्राम पंचायत शाहपुर शीतलाखेड़ा में उस वक्त एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ जब उत्तराखंड पंचायतीराज निदेशक निधि यादव ने परिवार रजिस्टर के डिजिटलीकरण का शुभारंभ किया। इस कदम के साथ ही जनपद हरिद्वार के 318 ग्राम पंचायतों के लिए एक नई डिजिटल क्रांति की शुरुआत हो गई।

अब तक, उत्तराखंड के अन्य जनपदों में आईटीडीए (ITDA) के माध्यम से ग्राम पंचायतों के परिवार रजिस्टर को ऑनलाइन किया जा चुका था, लेकिन हरिद्वार इस सुविधा से अछूता था। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा था—प्रमाणपत्रों की नकल लेने के लिए लंबी कतारें, ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों का बढ़ता बोझ और सबसे भयावह खतरा—फर्जी नकलों का गोरखधंधा।

डिजिटलाइजेशन से लगेगी फर्जीवाड़े पर लगाम!

शुभारंभ कार्यक्रम में निदेशक निधि यादव ने स्पष्ट किया कि अभी तक हरिद्वार में परिवार रजिस्टर की नकल मैनुअल रूप से जारी की जा रही थी, जिससे भ्रष्टाचार की संभावनाएं बनी रहती थीं। जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह ने भी स्वीकार किया कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा जाली नकल बनाकर इसका दुरुपयोग किए जाने की शिकायतें मिली थीं। लेकिन अब, डिजिटलीकरण से यह खेल खत्म हो जाएगा।

ग्राम पंचायत भवन से उठी बदलाव की लौ

शुभारंभ का आयोजन किसी आलीशान होटल में न होकर ग्राम पंचायत भवन में किया गया—यह न केवल एक सराहनीय पहल थी बल्कि सरकारी संसाधनों के उचित उपयोग का भी संदेश दे रही थी। इस अवसर पर उपस्थित ग्राम प्रधान दीपक सैनी, सहायक विकास अधिकारी बिजेंद्र सैनी, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी अजय सिंह चौहान, और पंचायत संगठन अध्यक्ष कुलदीप सिंह चौहान सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने इसे ऐतिहासिक क्षण करार दिया।

ग्रामवासियों ने की ग्राम प्रधान दीपक सैनी की प्रशंसा

कार्यक्रम के दौरान ग्रामवासियों ने ग्राम प्रधान दीपक सैनी की खुलकर प्रशंसा की और उनके प्रयासों की सराहना की। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि आने वाले चुनावों में वे फिर से उन्हें ग्राम प्रधान के रूप में देखना चाहते हैं। ग्रामवासियों का कहना था कि दीपक सैनी ने हमेशा गांव के विकास को प्राथमिकता दी है, और यह डिजिटलीकरण उनकी दूरदर्शिता और कड़ी मेहनत का ही नतीजा है।

क्या बदलेगा अब?

आम जनता को मिलेगी राहत: अब प्रमाणपत्रों की नकल के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे।

पंचायत अधिकारियों का काम होगा आसान: समय और श्रम की बचत होगी।

फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक: डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित होंगे।

हरिद्वार के लिए यह एक नया अध्याय है—एक ऐसा अध्याय, जहां तकनीक के सहारे पारदर्शिता, सुविधा और सुरक्षा की नई शुरुआत होने जा रही है!

 

 

 

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