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संस्कार स्कूल के बच्चों ने सावन पर दिया सनातन संस्कारों का संदेश

हरिद्वार:(संवाददाता पुनीत कुमार) सावन माह का प्रत्येक दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है, वहीं सावन का पावन बुधवार श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत वातावरण लेकर आया। इसी पावन अवसर पर हरिद्वार के रानीपुर मोड़ स्थित विवेक विहार के संस्कार स्कूल में एक अत्यंत प्रेरणादायी और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला, जब विद्यालय की प्रिंसिपल अनु आहूजा , शिक्षकगण एवं नन्हे-मुन्ने विद्यार्थी भगवान शिव के मंदिर पहुँचे और पूरे श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना की।

मंदिर परिसर में बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष लगाए। विद्यालय के विद्यार्थी अभय, शिवाय रावल और यद्विक सहित सभी बच्चों की मधुर आवाज़ों से मंदिर परिसर शिवमय हो उठा और वहाँ उपस्थित श्रद्धालुओं का मन भक्तिभाव से भर गया। भगवान शिव के प्रति बच्चों की निष्कपट श्रद्धा, मासूम भक्ति और चेहरे पर झलकती प्रसन्नता ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।विद्यालय परिवार ने इस अवसर पर बच्चों को भगवान शिव के जीवन, उनके आदर्शों तथा सावन माह के धार्मिक महत्व के बारे में भी जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि भगवान शिव त्याग, करुणा, सरलता, सत्य और धैर्य के प्रतीक हैं तथा उनके आदर्शों को जीवन में अपनाकर प्रत्येक व्यक्ति एक बेहतर इंसान बन सकता है। इस प्रकार धार्मिक आयोजन को केवल पूजा तक सीमित न रखते हुए बच्चों को नैतिक एवं सांस्कृतिक शिक्षा से भी जोड़ा गया।विद्यालय का मानना है कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में संस्कार, नैतिक मूल्य और भारतीय संस्कृति का ज्ञान भी उतना ही आवश्यक है। यदि बचपन से ही बच्चों में अपने धर्म, संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना विकसित की जाए तो वे भविष्य में जिम्मेदार, संस्कारवान और समाज के प्रति समर्पित नागरिक बन सकते हैं।

इस आयोजन के दौरान प्रधानाचार्य अनु आहूजा एवं शिक्षकगण ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया और उन्हें भारतीय संस्कृति के महत्व से अवगत कराया। बच्चों ने भी पूरे अनुशासन और श्रद्धा के साथ कार्यक्रम में भाग लेकर यह संदेश दिया कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शिक्षा का समन्वय भी अत्यंत आवश्यक है।संस्कार स्कूल द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम केवल धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और नैतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सराहनीय प्रयास भी था। ऐसे आयोजन बच्चों के भीतर अनुशासन, सेवा, सम्मान, सहयोग और आध्यात्मिक चेतना का विकास करते हैं, जिससे उनका सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण होता है।समाज में ऐसे सकारात्मक प्रयासों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। वर्तमान समय में जब आधुनिकता के साथ पारंपरिक मूल्यों से दूरी बढ़ती दिखाई देती है, ऐसे में विद्यालयों द्वारा बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह पहल न केवल विद्यार्थियों बल्कि अभिभावकों और समाज के लिए भी एक प्रेरणादायी संदेश प्रस्तुत करती है कि आने वाली पीढ़ी को संस्कारों, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति से जोड़ना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

संस्कार स्कूल की प्रिंसिपल अनु आहूजा, समस्त शिक्षकगण एवं विद्यालय प्रबंधन इस प्रेरणादायी पहल के लिए बधाई और प्रशंसा के पात्र हैं। उनके सतत प्रयास निश्चित रूप से बच्चों में सनातन संस्कृति, भारतीय परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति श्रद्धा एवं सम्मान का भाव मजबूत करेंगे तथा भविष्य के लिए संस्कारवान पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

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