
हरिद्वार:(जीशान मलिक) भारत में दशहरा, जिसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है। दशहरा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह समाज को सत्य, सदाचार, मर्यादा और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है।
“भगवान श्रीराम ने किया था रावण का वध”
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में लंका के राजा रावण ने भगवान श्रीराम की पत्नी माता सीता का हरण कर लिया था। माता सीता को रावण के चंगुल से मुक्त कराने के लिए भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई की। इसके बाद भगवान श्रीराम और रावण के बीच भीषण युद्ध हुआ, जिसमें भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया। इसी विजय की स्मृति में दशहरा मनाया जाता है। इस दिन देश के विभिन्न हिस्सों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। यह परंपरा बुराई के अंत और अच्छाई की विजय का संदेश देती है।
“मां दुर्गा की विजय से भी जुड़ा है पर्व”
दशहरे का संबंध मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा ने महिषासुर नामक असुर का वध कर देवताओं और संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इसी कारण विजयादशमी को शक्ति, साहस और धर्म की विजय के रूप में भी मनाया जाता है। देश के अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व को मनाने की परंपराएं भिन्न हो सकती हैं, लेकिन इसका मूल संदेश एक ही है—अन्याय और बुराई का अंत निश्चित है।
“नौ दिनों की पूजा के बाद मनाई जाती है विजयादशमी”
शारदीय नवरात्र के नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इसके अगले दिन आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। इस अवसर पर मंदिरों में पूजा होती है, धार्मिक आयोजन किए जाते हैं और कई स्थानों पर रामलीला के समापन के साथ रावण दहन किया जाता है। कुछ क्षेत्रों में शस्त्र पूजन और नए कार्यों की शुरुआत करने की भी परंपरा है।
“रावण दहन के साथ बुराइयों को त्यागने का संदेश”
दशहरा हमें यह भी सिखाता है कि केवल रावण के पुतले का दहन करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या, छल और अन्य बुराइयों को दूर करने का संकल्प लेना भी आवश्यक है। रामायण की कथा में रावण को विद्वान और शक्तिशाली होने के बावजूद उसके अहंकार तथा गलत कार्यों के कारण विनाश का सामना करना पड़ा। भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, कर्तव्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
“समाज को एकता और सद्भाव का संदेश”
दशहरे का पर्व लोगों को आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा देता है। यह त्योहार याद दिलाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। विजयादशमी का वास्तविक महत्व तभी सार्थक होगा, जब लोग अपने जीवन में अच्छे विचारों को अपनाएं, दूसरों के अधिकारों का सम्मान करें और समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने का प्रयास करें।

