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पत्थर-पत्थर पर दुआ: काबा की तामीर का रूहानी वाक़िया

नई दिल्ली:(जीशान मलिक)इस्लाम के सबसे मुकद्दस घर, काबा शरीफ़ की तामीर का वाक़िया ईमान, इताअत और कुर्बानी की सबसे बड़ी मिसाल है। कुरआन-ए-करीम के मुताबिक यह मुबारक काम अल्लाह के हुक्म से हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम और उनके बेटे हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम ने अंजाम दिया।

1. अल्लाह का हुक्म और जगह का इंतख़ाब:

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को अल्लाह तआला ने हुक्म दिया कि मक्का की बे-आब-ओ-गियाह वादी में अपने रब के घर की बुनियाद रखें। यह वही जगह थी जहां हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम और हज़रत हाजरा अलैहा को पहले छोड़ा गया था और ज़मज़म का चश्मा जारी हुआ था। कुरआन ए मजीद में आया है। कि याद करो जब इब्राहीम और इस्माईल काबा की बुनियादें उठा रहे थे।

2. बाप-बेटे की मुबारक मेहनत:

बूढ़े बाप हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम और उनके नौजवान बेटे हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम ने मिलकर पत्थर ढोए और दीवारें उठाईं। हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम पत्थर लाते और हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम तामीर करते। ऊंचाई पर पहुंचने के लिए जो पत्थर इस्तेमाल हुआ, वह आज “मक़ाम-ए-इब्राहीम” कहलाता है। उस पर हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के क़दमों के निशान अब तक मौजूद हैं।

3. दुआ और कुर्बानी का पैग़ाम: 

तामीर के दौरान दोनों बाप-बेटे यह दुआ करते जाते ऐ हमारे रब! हमसे क़ुबूल फ़रमा, बेशक तू ही सुनने वाला जानने वाला है` यह अमल सिर्फ़ ईंट-पत्थर जोड़ना नहीं था, बल्कि अल्लाह की इताअत में अपनी राहत, वक़्त और ताक़त कुर्बान करना था। हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम पहले ही बेटे की कुर्बानी का इम्तिहान दे चुके थे, और अब घर की तामीर में भी बेटे के साथ शरीक थे।

4. हज की बुनियाद:

काबा मुकम्मल होने पर अल्लाह ने हुक्म फरमाया कि अब लोगों में हज का ऐलान कर दो उसी दिन से काबा तौहीद का मरकज़ और पूरी दुनिया के मुसलमानों का क़िबला बन गया। हर साल लाखों हाजी उसी जगह तवाफ़ करते हैं जिसे एक बाप और बेटे ने अपने हाथों से बनाया।

5.इस वाक़िये से मिलती सीख:

अल्लाह का हुक्म आते ही बिना सवाल के अमल करना।आज काबा शरीफ़ उसी बुनियाद पर क़ायम है जो हज़रत इब्राहीम और हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम ने रखी थी। यह इमारत सिर्फ़ पत्थरों का घर नहीं, बल्कि ईमान, सब्र और कुर्बानी की जीती-जागती निशानी है।

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