हरिद्वार: रानीपुर पुलिस ने एक सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली हत्या का खुलासा करते हुए मानवता को झकझोर देने वाली वारदात का पर्दाफाश किया है, जिसमें मात्र एक Redmi मोबाइल फोन छुपाने और पुलिस कार्रवाई के डर से दो युवकों ने एक दिव्यांग ई-रिक्शा चालक की गला दबाकर हत्या कर दी। मामला तब सामने आया जब 4 फरवरी 2026 को रामआसरे पुत्र नाथूराम, निवासी विष्णुलोक कॉलोनी रानीपुर, ने अपने 38 वर्षीय पैर से विकलांग पुत्र मनीष के 1 फरवरी से लापता होने की शिकायत दर्ज कराई, जिस पर थाना रानीपुर में गुमशुदगी दर्ज की गई। जांच में सामने आया कि मनीष का मोबाइल फोन पांवधोई मोहल्ला ज्वालापुर निवासी अयान उर्फ सुन्नत ने बैरियर नंबर-05 के पास कॉल करने के बहाने लिया और फरार हो गया। प्रभारी निरीक्षक आशुतोष राणा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने 6 फरवरी 2026 को BHEL स्टेडियम के पास से अयान को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से मृतक का मोबाइल बरामद किया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि मोबाइल छीने जाने के विरोध में जब मनीष उसके घर पहुंचा और पुलिस में शिकायत करने की धमकी दी तो उसने अपने साथी बिलाल (जो हाल ही में जेल से छूटा था) के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। दोनों ने मनीष को शराब पीने के बहाने BHEL के पास झाड़ियों में बुलाया, जहां विवाद के दौरान बिलाल ने मनीष को पकड़ा और अयान ने गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को प्लास्टिक के कट्टे में भरकर सुपरवाइजर हॉस्टल के पास झाड़ियों में फेंक दिया और ई-रिक्शा लावारिस छोड़कर फरार हो गए। अयान की निशानदेही पर पुलिस ने शव बरामद कर लिया है, जबकि दूसरे आरोपी बिलाल की तलाश जारी है। पुलिस ने मामले को हत्या में तरमीम करते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धाराओं 103(1), 303(2), 238 और 61(2) के तहत मुकदमा दर्ज कर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। गिरफ्तार आरोपी अयान उर्फ सुन्नत (20 वर्ष) पुत्र मेहराज, निवासी कुत्तीमार गली, ईदगाह रोड, मोहल्ला पांवधोई, ज्वालापुर, जनपद हरिद्वार है। इस पूरे खुलासे में प्रभारी निरीक्षक आशुतोष राणा, वरिष्ठ उपनिरीक्षक नितिन चौहान, उपनिरीक्षक विकास रावत, उपनिरीक्षक मंदीप सिंह सहित कांस्टेबल दीप गौड, सुमन डोभाल, रविंद्र बिष्ट और अजीतराज की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
गुमशुदगी से मर्डर मिस्ट्री तक, हरिद्वार पुलिस ने 48 घंटे में बेनकाब किए हत्यारे

